IGNOU BSOS 184 Free Assignment In Hindi 2022

BSOS 184

नृजातिया फिल्म निर्माण की तकनीक

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Table of Contents

BSOS 184 Free Assignment In Hindi july 2021 & jan 2022

सत्रीय कार्य-1

1 समाजशास्त्रीय फिल्म निर्माण (sociological filmmaking) के आयामों की संक्षेप में चर्चा कीजिए।

उत्तर- दृश्य चाहे कोई चित्रित छवि या फिल्म हो, वह एक महत्त्वपूर्ण माध्यम होता है किसी सभ्यता या संस्कृति को समझने का | एक छवि हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन का अभिलेख होती है।

इनसे हमें एक ऐसी भाषा मिलती है जो सांस्कृतिक, प्रजातीय, सामाजिक और भाषाई बाधाओं से आगे बढ़कर जाती है। कोई फिल्म एक लोकप्रिय मुख्यधारा से संबंधित या उसकी विशेषता वाली सिनेकला या एक वृत्तचित्र या एक नविज्ञान फिल्म हो सकती है।

फिल्मों की सभी शैलियों और उसकी रचना-पद्धतियों से हमें किसी समाज और उसकी संस्कृति को समझने में मदद मिलती है। _

एक नृवंशविज्ञानी फिल्म को समझने के प्रारंभिक रूप के रूप में हम कह सकते हैं कि यह एक अकाल्पनिक फिल्म है।

नृविज्ञान फिल्में दृश्य एवं मानव संबंधी विज्ञानियों और समाजशास्त्रियों के बीच प्रमुख परंपरा और प्रथा होती हैं। यह सभ्यताओं और समाजों का एक प्रामाणिक वृत्तांत माना जाता है।

(1) नृविज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता क्यों?-समाजशास्त्र और नृविज्ञान में नृवंशविज्ञान एक ऐसी अनुसंधान एवं शोध तकनीक है जिसके द्वारा लंबे समय तक मानव व्यवहार का विस्तृत विवरण और विश्लेषण किया जाता है। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

नृवंशविज्ञान विधि क्षेत्र कार्य (Field Work) पर आधारित होती है। यह एक समाजशास्त्रीय पद्धति होती है जिससे यह पता चलता है कि लोग किस प्रकार जीवन व्यतीत करते हैं

और एक विशेष स्थान पर एक-दूसरे के साथ अपने जीवन के अर्थ पूर्ण कैसे बनाते हैं। उनके प्रतिदिन के संवाद, उनके सामाजिक संगठन और भौतिक स्थानों की सामाजिक संरचना आदि जैसी अन्य चीजों के माध्यम से लोगों के जीवन को समझने पर ध्यान दिया जाता है।

आंकड़ों को इकट्ठा करने के लिए निकट भविष्य में शोधकर्ता साक्षात्कार विधि, प्रतिभागी अवलोकन, गैर–प्रतिभागी अवलोकन, प्रश्नावली जैसी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हैं।

(2) एक फिल्म और एक नृजातीय पाठ्य का निर्माण कैसे होता है?-परंपरागत रूप से, समाजशास्त्र और नृविज्ञान द्वारा इस तथ्य पर जोर दिया जाता है कि किसी भी सभ्यता या समाज और इसके सामाजिक जीवन के बारे में बताने के लिए लिखित शब्दों पर भरोसा किया जा सकता है।

समाजशास्त्र और मानवविज्ञान समाजों की जाँच करने के लिए कुछ तकनीकों का पालन किया जाता है। ये तकनीकें विविध और अलग-अलग प्रकार की होती हैं और इसमें अवलोकन-सहभागी और गैर-प्रतिभागी, फोकस समूह चर्चा आदि जैसी तकनीकों को शामिल किया जाता हैं।

जब हम कोई आँकड़े (Data) इकट्ठा करते हैं तो यह एक प्रारूप में न होकर अपरिष्कृत एवं अव्यवस्थि रूप में होता है और अक्सर क्षेत्र में एकत्रित टिप्पणियों के लिए निर्दिष्ट व उल्लेखित किया जाता है,

आँकडों का संग्रह हमारी रुचि पर निर्भर करता है और हमारे पास अनुसंधान विषय होता है। शोधकर्ता को अपनी नोटबुक में फिल्म से संबंधित कथनों, कमेन्ट्स और आलोचनाओं को लिखने में कुछ महीने या एक साल लग सकता है। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

नृशास्त्री (Enthrography) एक श्रव्य उपकरण (Audio Device) का उपयोग करके किसी का साक्षात्कार भी रिकॉर्ड कर सकता है। तब शोधकर्ता फील्ड नोट्स का अध्ययन करता है और साक्षात्कारों को प्रसारित करता है।

एक बार जब यह कार्य संपन्न हो जाता है तो शोधकर्ता एकत्रित किए गए आँकड़ों का विश्लेषण करता है और शोध समस्या के आधार पर इसे एक संरचित प्रारूप में रखना और प्रस्तुत करना शुरू कर देता है।

एकत्रित किए गए आंकड़ों का बहुधा लेखन और पुनर्लेखन कार्य होता है। जब भी शोधकर्ता लिखता है तो वह अपने फील्ड नोट्स से संदर्भ लेता है और आँकड़ों का लेखन और पुनर्लेखन करता है।

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2 फिल्म बनाने के विभिन्न तरीकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- फिल्म निर्माण की विभिन्न शैलियों एवं प्रणालियों का फिल्म निर्माण में अत्यधिक महत्त्व होता है। बिल निकोल्स के अनुसार, हम फिल्म निर्माण के छ: अलग-अलग प्रणालियों/शैलियों को अभिनिर्धारित कर सकते हैं।

फिल्म निर्माण की ये प्रणालियाँ हमें एक स्वच्छंद ढाँचा यह समझने के लिए प्रदान करती हैं कि फिल्म कैसे बनाई जाती है। हर फिल्म निर्माता एवं निर्देशक की फिल्म निर्माण करने की अपनी अलग और विशिष्ट शैली होती हैं।

प्रत्येक प्रणाली का विकास दूसरे प्रणाली से हुआ है और पहले वाली प्रणालियाँ तरीकों के साथ फिल्म निर्माताओं के असंतोष के परिणामस्वरूप दूसरी प्रणाली नवीन उभर कर सामने आई है।

ये प्रणालियाँ न तो विकासवादी है और न ही एक दूसरे से बेहतर होने की परिचायक सिद्ध होती हैं। हालाँकि फिल्म निर्माण की प्रणालियाँ हमें फिल्म निर्माण के विभिन्न शैलियों के उद्भव के इतिहास के बारे में बताती हैं अहसास कराती हैं। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

यह आवश्यक नहीं कि एक फिल्म निर्माता को फिल्म निर्माण की केवल एक ही शैली और प्रणाली का पालन एवं अनुसरण करें फिल्म निर्माण के इन प्रणालियों का उद्भव भी प्रौद्योगिकी के उद्भव से जुड़ा हुआ होता हैं।

वे फिल्म निर्माण की विभिन्न प्रणालियों का समन्वयक कर अनुप्रयोग कर सकते हैं। न ही यह आवश्यक है कि हाल की के फिल्मों को फिल्म निर्माण की अत्याधुनिक प्रणाली का ही प्रयोग करना होगा।

फिल्म निर्माण की वो प्रणाली जो आज के समय में अत्याधुनिक न हों, उसका अनुप्रयोग फिल्म निर्माता द्वारा किया जा सकता है।

बिल निकोलस फिल्म निर्माण की छह प्रणालियों को अभिनिर्धारित करते हैं। अपने उद्भव के अनुसार ये प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं

• काव्यात्मक वृत्तचित्र
• वर्णनात्मक वृत्तचित्र

• अवलोकनात्मक वृत्तचित्र . प्रतिभागी वृत्तचित्र
• प्रतिवर्तक/आत्मार्थक वृत्तचित्र
• क्रियात्मक वृत्तचित्र

उपरोक्त सभी प्रणालियाँ पारस्परिक से अनन्य श्रेणियों/विशिष्ट श्रेणियों के रूप में उपस्थित नहीं रहती हैं। काव्यात्मक प्रणाली में प्रदर्शनात्मक और क्रियात्मक प्रणाली को शामिल किया जा सकता है।

प्रतिवर्ती/आत्मार्थ प्रणाली में प्रतिभागी और अवलोकनात्मक फुटेज हो सकते हैं। अवलोकनात्मक प्रणाली वर्तमान तक सीमित रहती थी।BSOS 184 Free Assignment In Hindi

फिल्म निर्माता द्वारा प्रतिभागी प्रणाली में प्रदर्शनात्मक और क्रियात्मक प्रणाली को शामिल किया जा सकता है। प्रतिवर्ती/आत्मार्थ प्रणाली में प्रतिभागी और अवलोकनात्मक फुटेज हो सकते हैं।

अवलोकनात्मक प्रणाली वर्तमान तक सीमित रहती थी। फिल्म निर्माता द्वारा प्रतिभागी और रेफ्लेक्सिव प्रणालियों का उद्भव इस अहसास के साथ हुआ है कि फिल्माए जा रहे लोगों के साथ घनिष्ठ संबंधों को छुपाने और उसका मुखौटा बनाना आवश्यक नहीं होता है।

काव्यात्मक वृत्तचित्र 1920 के दशक में फिल्म निर्माण के लिए काव्यात्मक शैली का प्रारंभ हुआ था। इस तरह की प्रणाली फिल्मांकन की रैखिक प्रणाली नहीं होती है। फिल्म निर्माण की यह शैली कहानी कहने की सरल तथ्यात्मकता से परे चली जाती है।

अभिनेताओं को पूर्ण एवं सक्षम पात्रों के तौर पर निक्षेप (Cast) नहीं किया जाता हैं। काव्यात्मक प्रणाली हमें यथार्थ के वैकल्पिक रूप प्रदान करती है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी नायक को रोता हुआ दिखलाना चाहते हैं तो काव्यात्मक प्रणाली में फिल्म निर्माता केवल बारिश के माध्यम से इसको दिखला सकता है।

यदि आप किसी को दौडते हए दिखाना चाहते हैं तो आप फिर से सिर्फ घुड़दौड़ की सुंदरता को दिखा सकते हैं। किसी देश के लिए खेल का महत्त्व उजागर करने और उस पर प्रकाश डालने के लिए आप फिल्म की पृष्ठभूमि में किसी भी देशभक्ति संगीत के साथ खेल को दिखला सकते हैं।

इससे सीधे और सरल तरीके से वास्तविकता एवं यथार्थ का ज्ञान मिलने के बजाय यथार्थ का वैकल्पिक रूप प्राप्त होता है।

वे किसी पद्य एवं कविता की तरह शैली में अमूर्त, निराकार और स्वच्छंद होते हैं। किसी फिल्म की कल्पना कीजिए जहाँ पर पानी बह रहा हो या पानी गिर रहा हो और उस फिल्म की शूटिंग करने के तरीके को थोड़ा ध्यान से देखें । BSOS 184 Free Assignment In Hindi

उदाहरण के लिए इस वीडियो को यूट्यूब पर देखें | बिल हैन्स्ट्रा का वृत्तचित्र ‘ग्लास’ भी ऐसी ही एक दूसरी काव्यात्मक डाक्यूमेंट्री है।

यह ग्लास ब्लोअर और उनके काम की सुंदरता ध्यान केंद्रित करती है। यदि फिल्म में किसी नगर को दिखाया गया हो तो फिल्म उस नगर के बारे में बताने के लिए लोकप्रिय स्मारक जैसे इंडिया गेट, लोट्स-टेंपल, कुतुबमीनार, कनॉट प्लेस, मेट्रो या हनुमान जी की विशाल मूर्ति भी दिखाकर उस शहर का अहसास करा सकती हैं।

जिस क्षण पार्श्व आप उस स्मारक के आसपास उड़ते हुए कबूतरों, ट्रैफिक जाम और भुट्टे वाले को देखेंगे आपको भारत की राजधानी दिल्ली का आभास होगा।

फिल्म निर्माता द्वारा अतीत की निशानियों से खींची गई इन जगहों की तस्वीरों को दिखाते हुए भी समय बीतने को दिखाया जा सकता है।

सत्रीय कार्य -II

3 सहभागी (participatory) और प्रतिवर्त (reflexive) वृत्तचित्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।

त्तर- लोगों के जीवन की समीक्षा करने के लिए प्रतिभागी अवलोकन के प्रयोग का समर्थन नृविज्ञानी और समाजशास्त्र द्वारा किया गया है BSOS 184 Free Assignment In Hindi

। प्रतिभागी अवलोकन में फिल्म निर्माता किसी स्थिति में लंबे समय तक क्षेत्र में रहना और उन पात्रों, चरित्रों और विषयों के साथ मिलकर एक हो जाना शामिल होता है, जिनका अवलोकन एवं समीक्षा किया जाना है।

शोधकर्ता से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उन लोगों निष्पक्षता और दूरी बनाये रखने में सक्षम होंगे जिनका अवलोकन एवं समीक्षा की जा रही है।

अवलोकनात्मक प्रणाली में यह देखा गया है कि फिल्म निर्माता की उपस्थिति न के बराबर होती है और यह समझा जाता है कि फिल्म निर्माता किसी भी तरह लोगों के बीच वार्तालाप को प्रभावित नहीं करते हैं।

हालांकि प्रतिभागी प्रणाली में फिल्म निर्माता कैमरा के सामने रहकर जिन लोगों के समीक्षा कर रहे होते हैं उनके साथ मिलकर एक हो जाते हैं।

निर्माता किसी भी प्रकार छुपे नहीं रहते हैं क्योंकि वे काव्यात्मक प्रणाली में निराकार रहते हैं; वर्णनात्मक प्रणाली में पार्श्व स्वर के रूप मे विद्यमान रहते हैं और अवलोकनात्मक प्रणाली में ‘अ फ्लाई ऑन द वॉल’ वाले दृष्टिकोण को अपनाकर उपस्थित रहते हैं।

यह प्रणाली 1960 के दशक में लोकप्रिय हुई जब समकालीन साउंड रिकॉर्डिंग करना संभव हो चुका था। इस प्रणाली को अक्सर तब प्रयोग किया जाता है जब फिल्म निर्माता अपने पात्रों, चरित्रों और विषय-वस्तु से साक्षात्कार कर रहे होते हैं। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

यह दर्शक को फिल्म निर्माण की प्रक्रिया के साथ शामिल होने का एहसास दिलाती है। 2011 में रॉस मैकलेवे की फिल्म ‘द फोटोग्राफिक मेमोरी’ इस प्रणाली का एक जीता-जागता उदाहरण है।

फिल्म निर्माता को अपने बेटे के साथ बातें करते हुए दिखाया जाता है और फिल्म में एक तर्कशाली किशोर के रूप में बड़े हो रहे बच्चे के दुविधा और उथल-पुथल को दिखाया गया है।

इसमें शामिल कुछ फिल्मों के उदाहरण इस प्रकार हैं-जीन रॉच की क्रॉनिकल ऑफ समर, एडगर मोरीन की पोर्टेट ऑफ जैसन, डेज़िगा वर्टोव की ‘द मैन विथ अ मूवी कैमरा ।

सिनेमा और सिनेमा-वेरिट मवमेन्टस अथवा यथार्थवादी सिनेमा द्वारा फिल्म निर्माण की इस शैली को अपनाया गया। इस फिल्म निर्माण की शैली का श्रेय जीन रॉउच को जाता है और फिल्म डेजिगा वर्टोव और रॉबर्ट फ्लेहर्टी से प्रेरित है।

इस विधा में फिल्म निर्माता कैमरे के सामने उपस्थित सकता है व अपने पात्रों, चरित्र और विषय वस्तु को शैलीगत वार्तालाप के संदर्भ में प्रभावित कर सकते हैं।BSOS 184 Free Assignment In Hindi

कैमरे की भूमिका को सदैव स्वीकार किया जाता है। दर्शक को इस बात का एहसास हो जाता है कि फिल्म निर्माता और पात्रों के बीच संबंधों पर बातचीत करने का क्या मतलब होता है। कौन किसे नियंत्रित कर रहा है इस बात की समझ विकसित हो जाती है।

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4 किसी पाठ्य सामग्री (text) के निर्माण और फिल्म निर्माण के बीच क्या समानता है?

उत्तर- परंपरागत रूप से, समाजशास्त्र और नृविज्ञान द्वारा इस तथ्य पर जोर दिया जाता है कि किसी भी सभ्यता या समाज और इसके सामाजिक जीवन के बारे में बताने के लिए लिखित शब्दों पर भरोसा किया जा सकता है।

समाजशास्त्र और मानवविज्ञान समाजों की जाँच करने के लिए कुछ तकनीकों का पालन किया जाता है। ये तकनीकें विविध और अलग-अलग प्रकार की होती हैं और इसमें अवलोकन-सहभागी और गैर-प्रतिभागी, फोकस समूह चर्चा आदि जैसी तकनीकों को शामिल किया जाता हैं।

जब हम कोई आँकड़े (Data) इकट्ठा करते हैं तो यह एक प्रारूप में न होकर अपरिष्कृत एवं अव्यवस्थि रूप में होता है और अक्सर क्षेत्र में एकत्रित टिप्पणियों के लिए निर्दिष्ट व उल्लेखित किया जाता है,

आँकडों का संग्रह हमारी रुचि पर निर्भर करता है और हमारे पास अनुसंधान विषय होता है। शोधकर्ता को अपनी नोटबुक में फिल्म से संबंधित कथनों, कमेन्ट्स और आलोचनाओं को लिखने में कुछ महीने या एक साल लग सकता है। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

नृशास्त्री (Enthrography) एक श्रव्य उपकरण (Audio Device) का उपयोग करके किसी का साक्षात्कार भी रिकॉर्ड कर सकता है। तब शोधकर्ता फील्ड नोट्स का अध्ययन करता है और साक्षात्कारों को प्रसारित करता है।

एक बार जब यह कार्य संपन्न हो जाता है तो शोधकर्ता एकत्रित किए गए आँकड़ों का विश्लेषण करता है और शोध समस्या के आधार पर इसे एक संरचित प्रारूप में रखना और प्रस्तुत करना शुरू कर देता है।

एकत्रित किए गए आंकड़ों का बहुधा लेखन और पुनर्लेखन कार्य होता है। जब भी शोधकर्ता लिखता है तो वह अपने फील्ड नोट्स से संदर्भ लेता है और आँकड़ों का लेखन और पुनर्लेखन करता है।

उन कथन और टिप्पणियों का वाक्यों और अनुच्छेदों में अनुवाद किया जाता है जो अव्यवस्थित रूप में लिखे गए होते हैं। शोधकर्ता को उस आँकड़े के साथ काम करना पड़ता है जो उसके पास होते हैं।

नए आँकड़े पाने का एकमात्र तरीका यह भी हो सकता है कि वह वापस अपने कार्यक्षेत्र में जाए और ताजा आँकड़े एकत्र करे।

अंत में जो भी पढ़ते हैं, यानी, जो कुछ जनता के लिए उपलब्ध होता है वह किताब या लेख के रूप में अंतिम संपादित संस्करण होता है जो भी हम पढ़ते हैं वह एक सहेज कर अंतिम रूप की कहानी होती है जो खंडमय नहीं अपित सरल कहानी होती है। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

5 फिल्म निर्माताओं (film makers) और फिल्माई गई हस्ती (filmed) के संबंध का वर्णन कीजिए।

त्तर-1920 के दशक में फिल्म निर्माताओं के पास एक उपनिवेशवादी दृष्टिकोण देखा जा सकता है। ‘गॉड्स मस्ट बी क्रेजी’ जैसी फिल्मों में यह मान लिया गया कि फिल्म निर्माता की उपस्थिति का फिल्मों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

फिल्म की आवाज फिल्म निर्माता की आवाज थी। फिल्म निर्माता ने गैर-प्रतिभागी पर्यवेक्षक की तरह काम किया।

1950 के दशक में हमने ‘डेड बस और द हंटर्स’ जैसी फिल्में देखी हैं जिसमें फ्लाई ऑन द वाल जैसे दृष्टिकोण को अपनाया गया है।

फिल्म निर्माता मानता है और यह कल्पना करता है कि उसकी उपस्थिति ने फाइनल आउटकम को प्रभावित नहीं किया है। यह दृष्टिकोण एक वैज्ञानिक और प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण था।

सिनेमाई लोगों के एक समूह द्वारा खरे, ईमानदार और सत्यप्रिय सिनेमा के दृष्टिकोण का अनुसरण किया गया।

जीन राउच, डजिगा वर्टोव और रॉबर्ट फ्लेहर्टी जैसे फिल्म निर्माताओं का विश्वास था कि उनका किया हुआ काम ‘ईमानदारी और सच्चाई’ को चित्रित करने का था। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

इसका मतलब यह भी हुआ कि फिल्म निर्माता अक्सर कैमरे के सामने होते थे और कैमरे की भूमिका को स्वीकार किया जाता था ।

स्पीगेल (Spiegel, अप्रैल 1984) इस बात की ओर इशारा करते हैं कि फिल्म निर्माता की कार्य-भूमिका एक शिष्ट अतिथि के समान होती है।

उदाहरण के तौर एक ‘शिष्ट अतिथि’ ध्यान देता है और इस बात का उपाय करता कि मेरमान की तारीला निर्माता मेजवान होने की कोपिपा करता अर्थात फिला बनाना और निर्माता की कार्य-भूमिका एक ‘शिष्ट अतिथि के समान होती है।

उदाहरण के तौर एक “शिष्ट अतिथि’ ध्यान देता है और इस बात का इशारा करता है कि मेहमान की तरह फिल्म निर्माता मेजबान होने की कोशिश करता है अर्थात् फिल्म बनाना और उसकी उपस्थिति गैर-हस्तक्षेप करने वाली होती है। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

वह आपस में बातचीत करता है और अपने रोजमर्रा और दिन-प्रतिदिन के कार्यों में भाग लेता है। आपस में तालमेल इस हद तक बन जाता है कि यह मान लिया जाता है कि कुछ समय बाद फिल्म बनाने में कैमरे की उपस्थिति को भुला दिया हैं।

फिल्मकार दुनिया को उसी रूप में ही देखता है जैसा कि फिल्म में फिल्माया गया है। प्रतिभागी अवलोकन की विधि का पालन किया जाता है, जिसमें फिल्म निर्माता फिल्म के साथ एक हो जाता है और शैलीगत बातचीत में लिप्त हो सकता है।

सत्रीय कार्य -III

6 समाजशास्त्रीय फिल्म निर्माता के सम्मुख आने वाली चुनौतियाँ क्या हैं?

उत्तर– फिल्म निर्माण के दौरान एक फिल्म निर्माता को कई नैतिक चुनौतियों से होकर गुजरना पड़ता है। औफरहाइड, जस्सी और चंद्रा लिखते हैं-“डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) फिल्म निर्माताओं ने खुद को रचनात्मक कलाकारों के रूप में स्थापित किया है,

जिनके लिए नैतिक व्यवहार उनके प्रोजेक्टों के मूल में निहित होता है (औफरहाइड, जस्सी और चंद्रा, एन.डी.) अभिनेताओं/अभिनेत्रियों/कलाकारों/टीम के अन्य सभी सदस्यों (विषयों) के संबंध में, फिल्म निर्माता अक्सर दो कारणों से अभिनेताओं/अभिनेत्रियों/कलाकारों/टीम के अन्य सभी सदस्यों (विषयों) की रक्षा करने के लिए खुद को बाध्य महसूस नहीं करते हैं: BSOS 184 Free Assignment In Hindi

सबसे पहले, वे मानते हैं कि अभिनेताओं/अभिनेत्रियों/कलाकारों/टीम के अन्य सभी सदस्यों (विषयों) ने खुद को नुकसान पहुंचाया है।

दूसरे, उनमें से कुछ सेलिब्रिटी या कॉर्पोरेट अधिकारियों की अपने स्वयं के जनसंपर्क जैसे साधनों के साथ मीडिया तक जाने की स्वतंत्र पहुँच होती है।

उसी समय, दर्शकों के मामले में, फिल्म निर्माता अक्सर व्यक्तिगत तथ्यों, दृश्यों और छवियों के अर्थों में हेरफेर को सही ठहराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे कहानी को अधिक प्रभावी ढंग से दर्शाने में मदद मिलती है

ताकि दर्शक किसी कहानी की मुख्य थीम, प्रसंग और मुद्दों को उतना ही सच मान लें, जितने सच वह हैं। हालाँकि, एक सर्वेक्षण के दौरान यह नोट किया गया है कि फिल्म निर्माताओं ने आम तौर पर दो क्षेत्रों (औफरहाइड, जैजी और चंद्रा, एन.डी.) में निराशा व्यक्त की थी।

सबसे पहले, वे यह स्वीकार करते हैं कि नैतिक रूप से उन्हें अमल में, प्रथाओं, परंपराओं और व्यवहारों में स्पष्टता और मानकों की कमी रहती है। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

दूसरे, फिल्म निर्माता आम तौर पर उनकी कारीगरी, हस्तकौशल शिल्प के नैतिक आयामों और उन्हें प्रभावित करने वाले आर्थिक और सामाजिक दबावों से भी अवगत होते हैं।

(2) वृत्तचित्र फिल्मकार और नैतिक चुनौतियाँ-औफरहाइड, जैजी, चंद्रा और एन.डी. के कथानुसार पत्रकारिता के विपरीत, वृत्तचित्र फिल्म निर्माण को काफी हद तक एक व्यक्तिगत और स्वतंत्र प्रयास के रूप में माना जाता है।

जब डिस्कवरी, नेशनल जियोग्राफिक और पीबीएस (द पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस इंक) जैसे बड़े निकासों के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का काम किया जाता है,

इनमें से कुछ निकाय फिल्म निर्माताओं को मानकों और प्रथाओं और/या प्रिंट जर्नलिज्म और ब्रॉडकास्ट न्यूज से निकले नैतिकता संहिता का पालन करने के लिए कह सकते हैं।BSOS 184 Free Assignment In Hindi

लेकिन इसके विपरीत, मानकों और नैतिकता (और यहां तक कि स्वतंत्र तथ्य-जाँच) के अवलोकन के संबंध में वह आगे लिखते हैं कि “डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) फिल्म निर्माता काफी हद तक व्यक्तिगत निर्णय, अधिकारियों से मार्गदर्शन और कभी-कभी फिल्म समारोहों में होने वाली सामयिक बातचीत पर भी निर्भर हो चुके हैं।

7 एथ्नोग्राफिक (नृजातीय) फिल्म निर्माण की संकल्पना पर प्रकाश डालिए।

त्तर- 1920 के दशक में नृविज्ञानी फिल्मों के निर्माण की शुरुआत की गई थी। ये फिल्में शैक्षिक फिल्में थीं और विदेशी लोगों की थीं और कभी-कभी इन फिल्मों को मानवविज्ञानियों की मदद से शूट की जाती थीं।

उदाहरण के लिए ,1920 में पाथ ब्रदर्स ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान विभाग की मदद से एडवर्ड कर्टिस लेंड ऑफ द हेड हंटर्स (कर्टिस, 1914) फिल्में बनाई थीं।

इनमें से कुछ फिल्मों की फिल्मांकन भी उनकी पथकथा के अनुसार किया गया । ऐसी ही एक फिल्म थी चांग (कूपर, 1927), जिसे थाईलैंड में लोगों के जीवन पर फिल्माया गया था,

उस फिल्म को कूपर और शूजैक ने बनाया गया था । उन फिल्मों के निर्माण में पेशेवर व्यक्तियों ने रुचि दिखायी जो संगीत वाद्ययंत्र बजाते थे और जो वहाँ के ‘मूल निवासी थे।

इन फिल्मों को मानव-जाति विज्ञान की दृष्टि से किसी सभ्यता या संस्कृति विशेष के मानकों के अनुसार माना जाता था। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

इन फिल्मों की मानविकीविदों द्वारा किसी सभ्यता या संस्कृति और जाति विशेष के रूप से आलोचना की गई और एक औपनिवेशिकवादी दृष्टिकोण का अनुसरण किया गया।

इसका सीधा मतलब था कि फिल्मों की शूटिंग पहले की तरह ही इस विश्वास के साथ की गई थी कि श्वेत व्यक्ति मूल निवासियों से बेहतर थे।

जेमी यूयस द्वारा कालाहारी के जू/होनसी पर आधारित फिल्म गॉड्स मस्ट बी क्रेजी (यू.एस., 1980) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिट हुई थी लेकिन जातीय और प्रजातीय आधार पर फिल्म की आलोचना की गई थी।

इस तरह की फिल्मों को संस्कृति का सीधा-सादा और सरल चित्रण माना गया था। वे महत्त्वपूर्ण नृवंशविज्ञान नहीं थे।

1920 के दशक में और शायद 1960 के दशक तक नृविज्ञान ने फिल्मों के विकास में कोई योगदान नहीं दिया । 1919 में मार्टिन और ओसा जॉनसन की अमंग द कैनबल आइल ऑफ द साउथ सीज (जॉनसन एम ई., 1918) और 1922 में हेड हंटर्स ऑफ द साउथ सीज (जॉनसन एम.) जैसी अपवादस्वरूप फिल्में थीं।

रॉबर्ट फ्लेहर्टी एक खनन इंजीनियर और एक खोजकर्ता थे, उनके द्वारा ‘नानूक ऑफ द नॉर्थ’ नामक फिल्म का निर्माण किया गया जो हडसन की खाड़ी के इनुइट परिवार पर आधारित थी।

8 एथ्नोग्राफिक फिल्म निर्माण के आयामों पर प्रकाश डालिए।

त्तर-आजादी के बाद की सबसे पहली मानव जाति संबंधी एथनोग्राफिक फिल्में जिन्हें भारत के सूचना फिल्स द्वारा प्रमाणित किया गया और बाद में फिल्म्स डिवीजन द्वारा अधिकृत किया गया था। इनमें से कुछ फिल्में जनजातियों की जीवनशैली पर फिल्मायी गई थीं BSOS 184 Free Assignment In Hindi

(क) पॉल जिल्स ने ‘द वैनिसिंग ट्राइब’, 1959 में बनाई, जो नीलगिरी के टोड्स जन-जाति की जीवनशैली पर फिल्मायी गई थी।

(ख) 1967 में श्याम बेनेगल ने ‘क्लोज टू नेचर’ फिल्म बनाई। यह घोटुल जन-जाति सहित मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जीवनशैली पर आधारित थी।

(ग) 1943 से 1956 के बीच इंफॉरमेशन फिल्म्स ऑफ इंडिया के तत्वावधान में ‘ट्री ऑफ वेल्थ’ फिल्म बनाई गई, जिसका निर्देशन भास्कर राव ने किया था। यह केरल के लोगों के जीवन में नारियल के महत्त्व पर आधारित थी। इस फिल्म को एडिनबर्ग फेस्टिवल में सम्मानित किया गया था।

घ) पॉल जिल्स, भारत में पहली एथनोग्राफिक (मानव जाति संबंधी) फिल्म बनाने वाले जर्मनी फिल्मनिर्माता थे. जिन्होंने 1955 ओरासन ऑफ बिहार और 1958 में मार्शल डांस ऑफ मालाबार फिल्म बनाई। वह ब्रिटिश भारत में इंफॉरमेशन फिल्म्स ऑफ इंडिया के प्रमुख थे।

(ङ) रोमन कर्मेन, एक रूसी फिल्म निर्माता जिन्होंने 1957 में द फ्ल्यूट एंड द ऐरो और अ स्वेड एरेन सक्सडॉर्फ फिल्म बनाई। फिल्म बस्तर के मुरीसों की जीवनशैली पर बनाई गई थी और सुक्सडॉर्फ के फील्डवर्क पर आधारित थी। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

मणि कौल के बैनर तले बन रही फिल्मों की थीम में आए परिवर्तनों को देखा जा सकता है। उन्होंने लुप्त हो रही लोक कलाओं और कलाकारों पर फिल्में बनाईं।

1953 में, उन्होंने ‘पपिटीअर्स’ (कठपुतली का खेल दिखाने वाला) फिल्म को बनाया ।

यह फिल्म कठपुतली की लुप्त होती कला पर बनाई गई थी और राजस्थान के कठपुतलियों का खेल दिखाने वालों की जीवनशैली पर आधारित थी। पश्चिमी भारत के लोक कलाकारों के जीवन पर आधारित फिल्म चित्रकाठी का निर्माण उन्होंने सन् 1977 में किया था।

9 फिल्म निर्माण में मौखिक साक्ष्यों से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ओटी, एन.डी. के अनुसार, “आज के इतिहासकारों के लिए मौखिक गवाही अत्यंत उपयोगी होती है। यदि मौखिक गवाही का उपयोग ध्यानपूर्वक और सावधान से किया जाता है और इसे किसी भी अन्य प्रकार के साक्ष्य की तरह व्यवहार किया जाता है,

तो हम अतीत के बारे में बहुत कुछ पता लगा सकते हैं। मौखिक गवाही हमें बता सकती है कि अतीत में जीवन कैसा था, BSOS 184 Free Assignment In Hindi

लोगों ने विभिन्न विषयों के बारे में क्या सोचा और यहाँ तक कि लोगों ने किसी विशेष घटना के बारे में कैसे बात की थी।

लेकिन मौखिक गवाही पूर्वाग्रह से मुक्त तब होती है जब पक्षपाती होने का सवाल उठाया जाता है। व्यावहारिक रूप से, हर कोई किसी न किसी तरह से पक्षपाती होता है।

यदि आप एक राजनीतिक पार्टी का समर्थन करते हैं, तो आप संभवतः दूसरे के खिलाफ पक्षपाती हो जाते हैं, यदि आप एक विचारधारा का समर्थन करते हैं, तो आपको संभवतः दूसरे के खिलाफ पक्षपाती माना जाता है।

जब भी आप विभिन्न पुस्तकों, टेलीविजन कार्यक्रमों, मुद्दों, यहाँ तक कि सरकारी नीति के बारे में बात कर रहे हैं, तो आप अपना पक्ष रख सकते हैं।

तो इसका क्या अर्थ है? क्या मतलब है? असल में, पूर्वाग्रह या पक्षपात का अर्थ होता है अनुचित या असंतुलित राय (ओटी, एन.डी.) ।

इतिहास को एक ऐसा विषय माना जाता है जहाँ लोग अपनी राय व्यक्त करते हैं। इसका आशय यह है कि पूर्वाग्रह से मुक्ति के लिए बहुत सारी सावधानी बरतने के साथ-साथ सावधानी भी आवश्यक है।

10 वृत्तचित्र की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर- वर्णनात्मक प्रणाली की विभिन्न विशेषताएँ निम्न हैं

• फिक्शन फिल्म की दीवाना करने वाली मनोरंजन गुणवत्ताओं के साथ से असंतुष्टता उभरी और दृष्टिगोचर हुई।

• वोइस ऑफ गॉड कमेंट्री, काव्यात्मक दृष्टिकोण से हमें ऐतिहासिक दुनिया के बारे में जानकारी मिलती है और उस दुनिया को नए सिरे से, नई दृष्टि से देखने की कोशिश की गई है, भले ही विचार रोमांटिक या शिक्षाप्रद एवं उपदेशात्मक हो। BSOS 184 Free Assignment In Hindi

• बिना शीर्षक या आवाज के, सीधे दर्शक को संबोधित करती है।

• ऐतिहासिक दुनिया के बारे में तर्क करती है।

• इसमें दर्शकों की तरफ कमेंट्री की जाती है; मौखिक कमेंट्री में इमेज और चित्रों का उदाहरण किसी समस्या के समाधान में लगभग नाटकीय भागीदारी की भावना और समझ पैदा करते हैं।

• गैर समकालिक ध्वनि होती है।

• फिल्म की एडिटिंग आमतौर पर स्थानिक/सामयिक/लौकिक की अपेक्षा शोर-शराबे की शब्दाडंबरपूर्ण निरंतरता को स्थापित/बनाए रखती है।

BSOC 109 Free Assignment In Hindi july 2021 & jan 2022

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