IGNOU MPA 17 Free Assignment In Hindi 2021-22

MPA 17

इलैक्ट्रॉनिक शासन

MPA 17 Free Assignment In Hindi

Table of Contents

MPA 17 Free Assignment In Hindi july 2021 & jan 2022

प्रश्न 3. प्रशासन में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की भूमिका की जांच कीजिए।

उत्तर-प्रशासन में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की भूमिका-सूचना और संचार प्रौद्योगिकी में आई क्रांति ने मानव-जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के विकास के परिमाणस्वरूप सुदूर क्षेत्र के स्कूलों में मल्टीमीडिया जैसे संसाधन उपलब्ध होने लगे हैं।

अतः कोई भी छात्र सर्वोत्तम शिक्षा और शिक्षक से वंचित नहीं रह सकता। सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से व्यवसाय, स्टॉक मार्केट, शिक्षा, चिकित्सा, इत्यादि अनेक क्षेत्रों से सम्बन्धित नवीनतम सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।

यह प्रौद्योगिकी हमारे कारोबार, प्रशिक्षण, खाना पकाने, यात्रा करने और इसी प्रकार के अन्य कामों को करने का अटूट अंग बन गई है। व्यवसाय के क्षेत्र में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी ने आमूल-चूल परिवर्तन करके उसके स्वरूप को ही बदल दिया है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

इस प्रकार यह सेवा वितरण लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक बनकर सेवाएं प्रदान करता है।
आंतरिक प्रशासन-सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का कार्य इलैक्ट्रॉनिक रूप में बदल गया है।

(1. विभागों/संगठनों में निम्न स्तर से लेकर उच्च स्तर पर आवेदन ऑनलाइन कर सकते हैं। फाइलों के सारे कार्य अब कम्प्यूटर पर होते हैं। इससे समय की बचत होती है और अधिक-से-अधिक कार्य शीघ्र होता है।

एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास फाइल पर नोटिंग के बाद ऑनलाइन भेज सकते हैं। अब व्यक्तिगत रूप से फाइल को भेजने की आवश्यकता नहीं है।

(2. अधिक से अधिक फाइलों और आँकड़ों को आसानी से कम्प्यूटर में रख सकते हैं और इनकी सुरक्षा आसानी से कर करते हैं। इससे जगह की भी बचत होती है। सम्पूर्ण कार्यालय में इलैक्ट्रॉनिकीकृत कार्य होने से समय की भी बचत होती है।

(3. कार्यालयों के कर्मचारियों के बीच संचार प्रणाली के कारण कार्य करना आसान हो गया है और समय की बचत होती है। सूचना प्रौद्योगिकी के कारण संगठन के कर्मचारियों को कम आना-जाना पड़ता है और वह अपना कार्य ध्यान से कर सकता है क्योंकि सारे कार्य मॉनलाइन होते हैं।

(4. कम्प्यूटर में भविष्य निधि छुट्टी के आवेदनों आदि को आसानी से रख सकते हैं। कर्मचारियों को छुट्टी के लिए आवेदन करना है तो वो ऑनलाइन कर सकते हैं।

(5. 70-80 के दशक में बहुत मोटी-मोटी कागजी फाइलें होती थीं। जिनमें कोई भी कागज ढूँढ़ना आसान नहीं था। कोई भी सूचना संभालना बहुत मुश्किल कार्य था। व्यक्तिगत रूप से भी फाइलों को इधर-उधर लेकर जाना पड़ता था। इस कारण कार्य करने में अधिक समय लगता था।

कोई भी फाइल या कागज खो जाने का डर रहता था। परंतु अब ऐसा नहीं है यह इलैक्ट्रॉनिकीकृत प्रशासन है। विभागों, संगठनों आदि का कार्य कम्प्यूटर आधारित है। अब सारी फाइलें कम्प्यूटर पर बनाई जाती हैं।

अब सारा कार्य नेटवर्क से जुड़ा है। फाइलों का आदान-प्रदान इंटरनेट द्वारा हो जाता है। इस कारण समय की बचत होती है और अधिक कार्य हो सकता है। कम्प्यूटर में से फाइलें खोने का डर नहीं रहता, उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। MPA 17 Free Assignment In Hindi

प्रभावकारी आंतरिक प्रशासन के लिए प्रौद्योगिकी

(1. बेतार यंत्र-इंटरनेट द्वारा जरूरी कार्यों पर तुरंत ही ध्यान दिया जा सकता है। मोबाइल फोन के आगमन से यह कार्य करना आसान हो गया है। कार्यालय से बाहर रहने पर भी मोबाइल फोन द्वारा ई-मेल या वॉइस मेल से जरूरी सूचना कहीं भी पहुँचा सकते है।

मोबाइल कोन से ई-मेल, एस.एम.एम. और वॉइस मेल द्वारा कम समय जरूरी मामलों पर तुरंत ध्यान दे सकते हैं। आज के समय में बेतार प्रौद्योगिकी लोगों के लिए बहुत ही आवष्ठयक हो गई है।

( 2. एकीकृत संदेश प्रषण-यह भी संचार का भाग है। पर्सनल कम्प्यूटर द्वारा हम ब्राउचर तैयार करके वेब से भेज सकते हैं और वेब द्वारा प्राप्त भी कर सकते हैं। वॉइस मेल, फैक्स और इ-मेल का चेतार युक्तियों द्वारा अदान-प्रदान करना आसान हो गया है। इस कारण अधिक में अधिक समय बच पाता है।..

(3. भारत में पहली ई-मेल सेवा फरवरी, 1994 में प्रारंभ हुई और इसकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। कर्मचारियों के लिए इ मेल द्वारा संदेश का आदान-प्रदान करना, संदेष्ठों का जवाब देना आसान हो गया है ईमला का प्रयोग बढ़ाकर सरकारी व्यवस्था को सुधारा गया है।

(4. फाइल ट्रेकिंग मॉड्यूल-जब फाइलों एक डेस्क से दूसरे डेस्क में निर्धारित किया जाता है तब फाइल ट्रेकिंग मॉड्यूल द्वारा फाइलों की स्थिति का केन्द्र रिकॉर्ड करता है।

इसके द्वारा हम फाइल से जुड़ी सारी जानकारी केन्द्रीय स्थान से ले सकते हैं। इस प्रकार अधिकारियों को सूचना का आदान-प्रदान करना है। अधिकारी इन फाइलों को ऑनलाइन आदान-प्रदान कर सकते हैं। लगभग सारे कार्य ऑनलाइन किये जाते हैं और कागजी कार्य कम हो गई है।

संचालित कार्यवाही MPA 17 Free Assignment In Hindi

(1. देश के लगभग सभी राज्यों के कार्यालयों में कार्य कम्प्यूटरीकृत कर दी गई है। बजट निर्माण और राजस्व संग्रह कार्यालयों को कम्प्यूटरीकृत कर दिया गया है। कम्प्यूटर द्वारा ही भिन्न-भिन्न प्रकार के करों का भुगतान करते हैं।

( 2. कुछ राज्यों ने सॉफ्टवेयर की सहायता से पंजीकरण कम्प्यूटरीकृत कर दिया है। पश्चिम बंगाल ने अचल सम्पत्ति का लेखा-जोखा राष्ट्रीय सूचना केन्द्र द्वारा कम्प्यूटर पर पंजीकरण कर लिया है।

आंध्र प्रदेश में पंजीकरण विभाग में सरकारों की सम्पत्ति का पंजीकरण किया गया है और उनकी सम्पत्ति का मूल्यांकन किया जाता है।

(3. कई राज्यों में राष्ट्रीय सूचना केन्द्र द्वारा सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है जिसके द्वारा पत्रों की प्राप्ति व प्रेषण फंड प्रवाह प्रणाली, फाइल मॉनीटरिंग प्रणाली आदि कार्य इस सॉफ्टवेयर पर हो सकते हैं। यह बहुत से विभागों में प्रयोग किया जाता है।

(4. दिल्ली सरकार सारे कार्य कम्प्यूटरीकृत करने में लगी है। कम्प्यूटर का उपयोग सरकार की प्रक्रियाओं से लेकर हर विभाग और हर क्षेत्र में किया जा रहा है।

(5. अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करने के लिए सचिवालय विभागों वीडियो टेलीकॉन्फ्रेंसिंग इस्तेमाल की जाती है। आंध्र प्रदेश सरकार ने सरकारी व्यवस्था में समाधान के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नेटवर्क स्थापित किया है।MPA 17 Free Assignment In Hindi

(6. पश्चिम बंगाल और सिक्किम ने बहुभाषी सॉफ्टवेयर या पैकेज प्रयोग करते हैं। भूमि रिकॉर्ड प्रविष्टि, मान्यकरण, रिपोर्ट-निर्माण सुरक्षा आदि इस सॉफ्टवेयर में एकत्रित किया जाता है। –

(7. लगभग सभी राज्यों में प्रत्येक विभागों में कार्यों के लिए इंटरनेट प्रणाली विकसित की गई है। इसमें हम यात्रा भत्ता, छुट्टी यात्रा छूट आदि पता कर सकते हैं। इसके लिए योजना आयोग ने सॉफ्टवेयर प्रदर्शित किए हैं।

(8. कई राज्यों में पेंशन के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया है। जैसे पश्चिम बंगाल में शिक्षकों, नगर पालिकाओं और पंचायतों के कर्मचारियों की पेंशन के लिए सॉफ्टवेयर बना है।

(9. कई राज्य सरकारों ने कर्मचारियों और अधिकारियों को कम्प्यूटर से संबंधित प्रशिक्षण देना आरंभ कर दिया है। कई राज्य में विभागों और कार्यालयों में कम्प्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य किया है।

योजना और निर्णयन

सूचना प्रणाली द्वारा सूचना का भण्डारण कम्प्यूटर में किया जा सकता है। इस प्रकार की सूचना संयोजन करके रखने में आंकड़ा संयोजन के रूप में निर्णयन में सहायता मिल सकती है। विभिन्न प्रकार की नीतियों और योजनाओं के लिए ये एकत्र की गई रचना लुबारा इस्तेमाल की जा सकती है।

प्रबंधन सूचना प्रणाली – प्रबंधन सूचना प्रणाली ने सरकारों को ई-शासन हेतु एक बृहत सूचना भंडार उपस्थित किया है। के तहत विभिन्न सूचनाओं तथा आकड़ों को इकट्ठा करने, प्रसस्कृत करने, परिवद्धित करने तथा जनोपयोगी बनाने हेतु कार्य किया जाता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

निर्माण अथवा योजना निर्माण में प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा विशेष लाभ प्राप्त होता है। इसका उदाहरण महराष्ट्र के सिंचाई विभाग के पहल के रूप में देखा जा सकता है।

सिंचाई विभाग ने बृहत प्रबंधन सूचना प्रणाली प्रारंभ की है तथा राज्य के नेटवर्क प्रणाली में मंत्रालय से लेकर मंडल कार्यालय तक सिंचाई विभाग के विभिन्न स्तरों को शामिल किया गया है।

किसी भी विभाग द्वारा स्थापित यह सूचना प्रणाली जानकारी के बेहद उपयोगी स्रोत साबित होते हैं। नेटवर्किंग के मामले में विभिन्न कार्यालयों में संचार हेतु डायल अप नेटवर्क तथा स्थानीय नेटवर्क हेतु इंटरनेट का प्रयोग होता है।

कम्प्यूटरीकरण – सरकारी अथवा अर्द्धसरकारी विभागों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी हेतु कम्प्यूटरीकरण की । आवश्यकता पड़ती है। कम्प्यूटरीकृत प्रणाली ही संचार हेतु सर्वोत्तम साधन है।

आंकड़ों के रिकॉर्ड और संकलन के साथ परिवर्द्धन एवं संशोधन सूचना के प्रसारण में सहायता मिलती है। सरकारी विभागों में कम्प्यूटर अब आम प्रचलन में है-चाहे डाटा का संग्रहण हो या पंजीकरण हो सभी कार्य कम्प्यूटर से ही हो रहा है।

कम्प्यूटर के कारण जहां कागजी और रिकॉर्ड रखने के कार्यों में कमी आई है और मोटे-मोटे फाइलों से छुटकारा प्राप्त हुआ है, वहीं किसी भी रिकॉर्ड को केवल क्षण भर में प्राप्त किया जा सकता है।

पुलिस तथा परिवहन विभाग ने अपने सभी रिकॉडों को कम्प्यूटर में संग्रहित कर दिया है जिससे किसी भी वाहन का पंजीकरण, उनका रिकॉर्ड रखते हैं तथा इंटरनेट के माध्यम से अन्य पुलिस स्टेष्ठानों एवं विभागों से संबद्ध रहते हैं। MPA 17 Free Assignment In Hindi

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भूमि रिकॉर्ड संबंधी मामलों के लिए विभाग का कम्प्यूटरीकरण एक नवीन कदम है। कोष विभाग को भी कम्प्यूटरीकृत किया गया है। ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र सभी कुछ अब कम्प्यूटरीकृत कर दिया गया है।

वीडियो टेलीकॉन्फ्रेंसिंग – यह संचार का अत्याधुनिक तथा तकनीकी विकास का बेहतरीन उदाहरण है। ऑडियो-वीडियो डाटा की उपलब्धता ने कई मामलों को निपटाने में सहायता की है।

अदालती कार्रवाइयों में विभिन्न अदालतों में उपस्थिति को अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मान्यता भी प्राप्त है ताकि विदेश अथवा दूर-दूराज रह रहे गवाहों का बयान लिया जा सके।

साथ ही शिक्षा कि क्षेत्र में जहां स्कूलों की कमी है और संचार के साधनों का पूरी तरह से विकास नहीं हो सका है, वहां एक स्थान पर ही रहकर शिक्षक वीडियो के माध्यम से हजारों बच्चों को एक साथ संबोधित कर सकता है।

साथ ही अस्पतालों में विदेशी डॉक्टरों से सलाह के लिए यहां तक की कई ऑपरेशनों में भी टेली कांफ्रेंसिंग की सहायता ली जाती है। |

सेवा वितरण – सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी ने शासन में सेवा वितरण हेतु महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। सार्वजनिक सेवा के लिए दक्षता का होना आवश्यक है और प्रशासन की सहायता तथा उनके कार्य निष्पादन में दक्षता को संचार प्रौद्योगिकी द्वारा बल मिलता है। इस प्रकार मष्ठासन सेवा वितरण के माध्यम से निम्नलिखित सेवाओं को प्रदान कर सकता है MPA 17 Free Assignment In Hindi

प्रशासन ने सेवा वितरण के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण माध्यम इंटरनेट का प्रयोग आरंभ कर दिया, जिससे उसकी वेबसाइटों पर स्थानीय भाषा मतें तथा स्थानीय सूचनाओं के साथ विभागीय जानकारी उपलब्ध होती है।

सुदूर ग्रामीण क्षेत्र जहां संचार साधनों का अभाव है वहां मी सरकार ने प्रभावी संचार हेतु इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयत्न किए हैं। जनकल्याण के कार्यों हेतु विभिन्न सरकारों ने लोकभाषा में भी सूचनाए उपलब्ध करवाई है।

आंध्र प्रदेश, केरल,महराष्ट्र, कर्नाटक आदि राज्य हमसे अग्रणी एकल खिड़की प्रणाली की दिशा में आंध्र प्रदेश ने सार्वजनिक सेवाओं के वितरण हेतु नगर-नागरिक केन्द्रों तथा ई-सेवा केन्द्रों की थापना की। इस सेवा वितरण से रोजगार के लिए इच्छुक लोगों को अत्यधिक लाभ पहुंचा, जिन्हें सूचनाए सुविधापूर्ण ढंग से मिलने लगीं।

केरल में नागरिक विभाग ने लोगों के लिए फ्रेंड्स परियोजना का आरंभ किया, जिसमें सार्वजनिक सूचाएं तथा उपयोगिता पूर्ण सेवाओं के संदर्भ में जानकारी मिलती थी।

प्रश्न 5. महिला सशिक्तकरण तथा कृषि क्षेत्र की आधुनिकता में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई गई भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-सूचना और संचार प्रौद्योगिकी और महिला शक्तिकरण-महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने क्रांतिकारी योगदान दिया है।

गांव में गरीबी उन्मूलन तथा अशिक्षा दूर करने हेतु विभिन्न प्रयासों में महिलाओं की उपेक्षा हो जाती है। चूँकि गरीबी विरोधी कार्यक्रमों की योजना तथा कार्यावयन में सरकार एवं वास्तविक लाभ प्राप्तकर्ताओं कि मध्य बिचौलियों के कारण गरीबों के लाभ का कम अष्ठा ही मिल पाता था।

इसी कारण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास एवं अनुप्रयोगों से सीधे गरीबों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास हो रहा है तथा उन्हें उनके अधिकारों और लाभों की जानकारी दी जा रही है।

महिला सशक्तिकरण का मुद्दा भी इसी से जुड़ा है। इस दिशा में महिला स्वावलम्बन समूहों को अधिक स्थान दिया गया है। गांव की निर्धन महिलाओं को रोजगार देने से उनके अंदर आत्मविश्वास और आत्मबल पैदा होगा और वे सशक्त हो सकेंगी। MPA 17 Free Assignment In Hindi

UNICEF के सहयोग से 1982-83 में ‘महिला और बाल विकास ग्रामीण क्षेत्र कार्यक्रम’ आरंभ किया गया। राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान ने नागरिकों को कम्प्यूटर तथा इंटरनेट की सुविधा प्रदान की। इंटरनेट के संचालन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

साथ ही प्रिंटर, मल्टीमीडिया प्रणाली आदि से भी रू-ब-रू कराया जा रहा है। बचत, ऋण, आय इन सभी का लेखा-जोखा अब ग्रामीण जनता के समक्ष पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत है।

वे सीधे-सीधे जिला कलेक्टर के पास ई-मेल कर सकते हैं तथा अन्य अधिकारियों से भी संपर्क स्थापित कर सकते हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण में इन समूहों की भूमिका निर्विवाद है।

महिलाओं को भी समान रूप से ग्रामीण ज्ञान केन्द्र के रूप में शिक्षा दी जा रही हैं। अब महिलाएं भी विभिन्न कार्यों में भाग ले रही हैं तथा स्वावलम्बी हो रही हैं। हालांकि सर्वेक्षण में पाया गया है कि महिलाओं के सशक्तिकरण में जाति व धर्म के मुद्दों ने अवरोध उत्पन्न कर दिया है।

अतः इनकी मनोवृत्ति में परिवर्तन के पश्चात महिला सशक्तिकरण में और अधिक तीव्रता आएगी। कृषि में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग-कृषि के क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है।

ई-कृषि एक आधुनिक संचार तकनीक की प्रगति का नमूना है। इसके माध्यम से ग्रामीण कृषि विकास की वृद्धि पर ध्यान दिया जा रहा है। ई-कृषि की अवधारणा ने ग्रामीण क्षेत्र में विकास के साथ-साथ नई कृषि के मूल्यांकन पर भी विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया है।MPA 17 Free Assignment In Hindi

ई-कृषि अपेक्षाकृत एक नवीन अवधारणा है किन्तु इस क्षेत्र में अब ग्रामीण जनता पारंगत हो रही है। | कृषि उद्योग के प्रमुख चरण होते हैं-फसल की खेती, जल प्रबंधन, उवर्रक अनुप्रयोग, कीट प्रबंधन, फसल काटने, भोजन/खाद्य उत्पादों, पैकेजिंग, मूल्य संवर्द्धन, खाद्य सुरक्षा, खाद्य भंडारण, खाद्य विपणन आदि।

कृषि से संबंधित सभी लाभभोगियों को सूचना हेतु तकनीकी केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके लिए कुशल प्रबंधन की आवष्ठयकता है, जिससे सभी कृषकों को सूचना प्राप्त हो सके।

कोई भी व्यक्ति किसी भी समय जानकारी प्राप्त कर सके। साथ ही सूचना संक्षिप्त हो एवं जरूरतमंद के लिए उपयोगी होसूचना तक आम व्यक्ति की पहच आसान होनी चाहि

कृषि से संबंधित मुख्य सेवा प्रकार्य इस प्रकार हैं,

(i) सूचना प्रोसेसिंग उपसाधन – इन उपसाधनों से पर्यावरण एवं परिस्थितिकीय परिवर्तनों का आकलन किया जाता है।

(ii) शिक्षा एवं संचार प्रौद्योगिकी-शिक्षा के क्षेत्र में सूचना के नवीन तकनीकी विकास से अधिगम में सहायता प्राप्त होती है।MPA 17 Free Assignment In Hindi

राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान-

ग्रामीण ज्ञान केंद्र – ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के विकास के लिए यह आरंभ किया गया। इसके माध्यम से जानकारी, सहायता, समर्थन आदि की प्रक्रिया आरंभ हुई। उपलब्ध जानकारी के आधार पर कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन आरंभ हुआ।

शासन के द्वारा ज्ञान के अधिगम में काफी प्रयास किए गए। परिशुद्ध कृषि आधुनिक युग की आवश्यकता है। इसका संबंध यथार्थ जीवन से है, जहाँ कृषि कार्य के सभी पहलुओं में यथा-तथा विद्यमान हो।

भारत में ग्रामीण ज्ञान केंद्र के माध्यम से आय, रोजगार तथा खाद्यान्न इन तीनों की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम ज्ञान परियोजना का विलयानुर में कार्यशील केन्द्र है। गाँवों में आँकड़े उपलब्ध करवाने तथा ध्वनि संप्रेषण हेतु की LAN व्यवस्था की गई है।

भाग-II

प्रश्न 6. स्थानीय शासन में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के हस्तक्षेप की आवश्यकता और महत्त्व का वर्णन कीजिए तथा पंचायती राज संस्थाओं में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग क्षेत्रों का विस्तृत वर्णन कीजिए।

उत्तर-स्थानीय शासन में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का हस्तक्षेप : आवश्यकता और महत्त्व-हरदा जिले की 95 ग्राम पंचायतों में शीघ्र ही ई-ज्ञान एवं सूचना केंद्र खोले जाएंगे। शासन एवं आई सेक्ट ने संयुक्त रूप से इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

केंद्रों पर ग्रामीणों के लिए जहां ज्ञान का भंडार होगा, वहीं उन्हें सरकारी कागजात प्राप्त करने संबंधी तमाम सुविधाएं मिल सकेंगी।

ई-ज्ञान केंद्र खुलने के बाद ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु, जाति एवं मूल निवासी प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख की प्रति सहित अन्य छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

ग्राम पंचायत स्तर पर ही ग्रामीणों को इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। | जानकारी के अनुसार जिले की ग्राम पंचायतों में बी.एस.एन.एल. की ब्रॉडबैंड एवं सेटेलाइट सुविधा को लेकर पड़ताल शुरू हो गई है।

हालांकि, कुछ ही गांवों में ब्रॉडबैंड की सुविधा उपलब्ध है। इसके चलते इंटरनेट के उपयोग के लिए केंद्रों पर नेट सेटर का उपयोग किया जाएगा। इसके तहत जिले की 211 ग्राम पंचायतों में से 95 पंचायतों में ई-ज्ञान केंद्र खोले जाएंगे।

इसमें हरदा विकास खंड की 33 ग्राम पंचायतें, टिमरनी की 30 एवं खिरकिया की 32 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। केंद्र खुलने के बाद ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर, शासकीय योजनाओं की जानकारी, शैक्षणिक संस्थानों, मनोरंजन एवं फाइनैंस सेक्टर की तमाम जानकारियां एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।

बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार-गांवों में खुलने वाले ईशान सूचना एवं सेवा केंद्रों पर बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। इसके पूर्व आई सेक्टर द्वारा युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद गांवों में पहुंचकर युवा रोजगार से जुड़ सकेंगे।MPA 17 Free Assignment In Hindi

ई-ज्ञान केंद्रों पर मिलने वाली सुविधाएँ गाबों में खुलन थाले ३ झान एवं सूचना केंद्रों पर अलग अलग सिक्टरों की सुविधाएं, शासकीय योजनाओं की जानकारियां एवं सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

शासकीय सेवाओं में भू-अभिलेख की प्रतियां, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति, मूल निवासी प्रमाण पत्र, रोजगार संबंधी जानकारी राष्ठान कार्ड, चुनाव संबंधी कार्य, पेंशन योजनाएं, बिलों के भुगतान की सुविधा शामिल हैं।

शैक्षणिक सेवाओं में ग्रामीणों को कम्प्यूटर पाठ्यक्रम, आईटी, अंग्रेजी प्रशिक्षण एवं बैकिंग प्रशिक्षण मिल सकेगा। इसके अलावा ऑनलाइन पिवाओं में रेलवे टिकट, क्रय-विक्रय की जानकारियां एवं फायनेंशियल सेवाएं भी मिलेंगी। __

पंचायती राज संस्थाओं में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के हस्तक्षेप की आवश्यकता-पंचायतें ऐतिहासिक रूप से भारत में ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं और संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम (1992) ने त्रिस्तरीय शासन पद्धति के रूप में ग्राम, लॉक और जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं को संस्थागत रूप दिया है।

मई 2004 में पंचायती राज मंत्रालय को देश में पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण की देख-रेख के लिए नोडल एजेंसी के रूप में गठित किया गया।

मंत्रालय पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए योजनाएं, नीतियां और कार्यक्रम बनाता है। इन संस्थाओं के लिए विशेष रूप के कमजोर वर्गों यानी महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं। MPA 17 Free Assignment In Hindi

73वें संशोधन कि अस्तित्व में आने के बाद 15 वर्षों में पंचायतों के राजनीतिक सशक्तीकरण की प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर हासिल किया गया है।

मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती चुनाव झारखंड के अलावा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नियमित रूप से आयोजित किया गया है।

प्रत्येक पंचायत क्षेत्र में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को (कुछ राज्यों में) आरक्षण भी प्रदान किया गया है।

इसके अलावा हमारी पंचायती राज संस्थाओं के लिए कम-से-कम 10 लाख महिलाएं निर्वाचित हुई हैं। | पंचायती राज संस्थान और प्रशासन के कार्यों का लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के सशक्तिकरण की दिशा में एक और प्रगति हुई है।

सरकार ने “न्याय पंचायत विधेयक” प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य पंचायतों को कानूनी दर्जा प्रदान कर “अनौपचारिक विवाद निपटान” के लिए स्थानीय स्तर पर विवाद निपटाना है।

• मध्य प्रदेश
• ओडिशा: भुलेखा.

• उत्तर प्रदेश.
• उत्तराखंड: देव-भूमि MPA 17 Free Assignment In Hindi
• पश्चिम बंगाल : बंगला भूमि

पंचायती राज संस्थाओं में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी : अनुप्रयोग क्षेत्र-पंचायती राज व्यवस्था को लोकतंत्रीय प्रणाली की रीढ़ माना जाता है। भारत में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के विकास ने पंचायत में ग्राम स्तर पर भी लोगों को समेकित रूप से सूचना उपलब्ध करवाई।

भारत की अधिकांश जनता गांवों में निवास करती है। भारतीय अर्थव्यवस्था आज भी पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है। अतः कृषि को सूचना से जोड़ने पर विकास का एक नया रूप सामने आया, जो उत्पादन के रूप में तथा गुणवत्ता की दृष्टि से बेहतरीन था।

साथ ही ग्रामीणों को प्रशासन से जोड़ना भी एक पारदर्शी प्रक्रिया का आरंभ था, जो कि लोकतंत्र प्रशासन में एक युगप्रवर्तनकारी कार्य है। इसके लिए कई कार्य किए गए

(i) भौगोलिक सूचना प्रणाली
(ii) उपग्रह प्रतिबिम्ब

(iii) सॉफ्टवेयर

(iv) मध्य प्रदेश का जानदूत कार्यक्रम

अतः किसी भी परियोजना के आरंभ में नागरिकों को किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा चल्कि एक माउस के क्लिक करने से उन्हें उनके अधिकार व आबंटन की जानकारी मिल जाएगी। _

सहभागी योजना-किसी भी कार्य को करने के लिए सहभागिता एक अनिवार्य पहलू के रूप में सामने आता है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में सूचनाओं का बृहत संजाल तैयार करने की आवश्यकता है।

साथ ही सूचना के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण संचार पद्धति की भी जरूरत है। इस दृष्टि से सूचनाओं के संग्रहण और उनके एकत्रीकरण के पश्चात उनका संयोजन एवं परिष्कार कर प्रस्तुत करना चाहिए। भौगोलिक सूचना प्रणाली इस क्षेत्र में तीन तरह से कार्य करता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

(i) सूची बनाने
(ii) विश्लेषण करने
(iii) योजना बनाने

भौगोलिक सूचना प्रणाली का व्यापक महत्त्व है, इसक द्वारा भूमि तथा भूमि संसाधनों को स्पष्ट जानकरी मिलती है तथा पंचायत संसाधन मानचित्रण किए जा सकते हैं। पंचायती सूचना अनुप्रयोगों में इस तकनीक का सर्वोपरि स्थान है। इसके माध्यम से पंचायत, जिला स्तर पर भी योजनाओं के समेकन में सहायता मिलती है।

पंचायत अथवा ग्रामीण स्तर पर विकास हेतु कृषि संबंधी एवं अनुदान, आबंटन, मौसम आदि जानकारियां महत्त्वपूर्ण होती हैं। भौगोलिक सूचना प्रणाली आकड़ों के माध्यम से दक्षतायुक्त तथा प्रभावोत्पादक सूचना प्रदान करती है। पंचायती राज में सूचनाओं की प्राप्ति के निम्नलिखित क्षेत्र हैं

(i) कृषि विस्तार
(ii) मृदा संरक्षण

(iii) सामाजिक वानिकी
(iv) फार्म वानिकी
(v) मौसम संबंधी

कराधान-पंचायतों को यह अधिकार होता है कि वह अपने सीमा क्षेत्र में चुंगी तथा शुल्क लगा सकती हैं साथ ही उनका संग्रहण एवं विनियोजन कर सकती हैं।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास एवं सुलभता में पंचायत को जब राज्य स्तर पर आंकड़ों का ब्यौरा उपलब्ध करना होगा तो भ्रष्टाचार तथा कर संग्रहण में दोष का विवरण हो सकता है।

पंचायती राज के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों को कराधान प्रणाली से नियोजित किया जा सकता है। साथ ही जनता के समक्ष इसकी पारदर्शिता बनी रहेगी। MPA 17 Free Assignment In Hindi

शिक्षा-शासन के विकेंद्रीकरण ने पंचायती राज संस्थाओं को अधिकार प्रदान किया है। शिक्षा के संबंध में भी पंचायत स्तर पर प्राथमिक, माध्यमिक, व्यावसायिक, प्रौढ़ तथा अनौपचारिक शिक्षा की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होती है।

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सूचना एवं संचार में तकनीकी विकास के फलस्वरूप पंचायतों में शिक्षा व्यवस्था की अत्याधुनिक रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी सुसज्जित किया जा सकता है।

इसी उद्देश्य से भारतीय अनुसंधान संस्थान इसरो ने विश्व का प्रथम शिक्षा से संबंधित उपग्रह ‘एडुसेट’ लांच किया। इस सेटेलाइट के माध्यम से ऑडियो, वीडियो, इंटरनेट, आंकड़ों का प्रसारण आदि के साथ टी.वी. रडियो की भी सूचनार बिजी जा सकती हैं।

पंचायत संस्थाओं को इस प्रकार की 24 सेवा वाली शिक्षा 2 लाख रुपये देने के पश्चात दी जाती है। इससे ग्रामीण सुविधावंचित लोगों को शिक्षा के विकास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है

प्रशिक्षण-पंचायती राज संस्थाओं में चुनावोपरांत निर्वाचित सदस्यों के प्रशिक्षण हेतु विभिन्न कार्यक्रमों को बार-बार आयोजित करने में परेशानी हो सकती थी किन्तु सूचना तकनीक के विकास से इसे सुलभ बनाया जा सका है।

इंटरनेट, वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण की कठिनाइयों को आसान बना दिया गया है।

प्रश्न 8. ई-कॉमर्स (ई-वाणिज्य) के लाभों एवं सीमाओं का विस्तृत वर्णन कीजिए तथा इलैक्ट्रॉनिक भुगतान का वर्णन भी कीजिए।

उत्तर-ई-कॉमर्स : लाभ-नवीन परिवर्तन के बढ़ते क्रम में ऐतिहासिक विकास के साक्ष्यों को देखा जाए तो जितने लाभ ई-कॉमर्स के हैं, यह काफी है जिनमें टेक्नोलॉजी के वैश्विक स्वरूप, कम खर्च, करोड़ों लोगों तक साम्य बनाने की स्थिति, विभिन्न कार्य संबद्धताओं की संभावना और साधन की उपलब्धता तथा इसके लिए सहायक तत्वों की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण है।

जैसे ही इंटरनेट अपने विकसित अवस्था में पहुँची वैसे ही विभिन्न संगठनों, व्यक्तियों और समाज के लोगों को बहुत सारे लाभों का ज्ञान हुआ और धीरे-धीरे यह व्यक्तियों के भौतिक संसाधनों के आवश्यक यंत्र के रूप में प्रविष्टि हुआ है और यह पर्याप्त रूप से तब बढ़ेंगे, जब ये ई-कॉमर्स के साथ फैलेंगे।

ई-कॉमर्स के लाभ निम्नलिखित हैं MPA 17 Free Assignment In Hindi

• संगठन
• उपभोक्ता
• समाज

संगठन : वैश्विक स्तर पर ई-कॉमर्स बाजारीकरण को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों तक पहुँचाती है। न्यूनतम पूँजी के लगने से कोई भी कंपनी आसान तरीके से और तीव्र गति से ग्राहकों की संख्या में वृद्धि, अनुभवी एवं कुशल उत्पाद आपूर्ति करने वाले तथा सर्वश्रेष्ठ व्यापारिक भागीदारों की संख्या में आमूल-चूल वृद्धि की जा सकती है। इसके उत्तर

• यह बड़े-बड़े कंपनियों को छोटे स्तर के व्यापारियों से प्रतियोगिता करने में सहायक सिद्ध होता है।

• इसके द्वारा विभिन्न संसाधनों के बीच समय को कम करती है। जैसे-पूँजी लागत और उत्पाद व सेवाओं की प्राप्ति के बीच।

• इंटरनेट सस्ता साधन होने के कारण दूर संचार के खर्चे को कम करता है।

• जो सूचना कागज पर संप्रेषित की जाती थी, उसके संसाधन, वितरण, संग्रहण तथा संरक्षण पर होने वाले खर्चे को कम करती है।

• यह कुशल बाजारों का सकल संचालन तथा निर्माण करता है, जिसमें ग्राहक और दुकानदार लाभों का मूल्य पाते हैं।

• वैश्विक स्तर पर व्यापार में सहायक होती है तथा कंपनियों का विदेशों के बाजार में आगमन हो जाता है।

• कम खर्च में, कंपनियाँ अपने ज्यादा उत्पादित हुए माल तथा बचे हुए पुराने माल को कम समय में बेच सकती हैं। MPA 17 Free Assignment In Hindi

• वस्तुओं की सूची और अतिरिक्त खर्च को कम करने के लिए वह ‘प्रभाव-किस्म आमूर्ति श्रृंखला प्रबंधन’ को सुगम बनाती है। प्रभाव-किस्म प्रणाली वह प्रक्रिया है जो उपभोक्ता के आदेश से आरंभ होकर उसी समयाकाल में क्रियान्वित होती है।

इससे वस्तुओं का स्थानान्तरण होता है और उत्पाद सूची में खर्च कम हो सकता है

• व्यापार, पुनिर्निर्माण प्रक्रिया के प्रयासों का समर्थन करती है, जब क्रियाएं बदलती रहती हैं तो वस्तुओं के उत्पादन में अप्रत्याशित वष्टद्धि हो सकती है। इसके साथ-साथ विक्रेताओं अनुभवी कामगार तथा प्रशासकों की उत्पादकता में भी वृद्धि हो सकती है।

• बहुत कम समय तथा खर्च में अपने क्षेत्र से बाहरी उपभोक्ताओं तक अपनी पकड़ बना सकते हैं।

• इसके द्वारा संगठन बहुत सारे लोगों तक पहुंच सकते हैं, जिससे उत्पाद पूर्ति और सेवाओं का खर्च घट सकता है।

उपभोक्ता :

• बाजारीकरण के युग में ई-कॉमर्स उपभोक्ता को ज्यादा विकल्प देता है। ग्राहक को चयन करने की आजादी है और वह बहुत से व्यापारी और उत्पादों का चयन कर सकता है।

• ई-कॉमर्स के द्वारा उपभोक्ता अपने वस्तुओं की खरीद के लिए इंटरनेट के माध्यम से प्रत्येक वस्तुओं का मूल्य और उसके गुणों का अध्ययन कर वह अपनी पसंद तथा दूसरे वस्तुओं के साथ इसकी तुलना करके अपने अनुकूल सामानों की खरीद-बिक्री कर अपने पैसों की बचत कर सकता है

• जब हम इंटरनेट पर वस्तुओं को खरीद-बिक्री करने का वेबसाइट खोजते हैं तो इ-कॉमर्स हमें वह सुविधाएं मुहैया कराती है, जिसके माध्यम से हम वस्तुओं के प्रकार, कंपनी निर्माता, उत्पादन करने का समय इत्यादि आउटपुट प्राप्त करते हैं। जिसके माध्यम से हमें उत्पादों और सेवाओं की जल्द से जल्द उपलब्धता हो जाती है।

• किसी भी उत्पाद के बारे में यदि सूचना एकत्र करना हो, जैसे-नोकिया सेल फोन हमें लेना है और हम यदि नोकिया सेंटर पर जाकर पता लगाने की कोशिश करेंगे तो उसमें काफी समय तथा पैसा खर्च होगी लेकिन ई-कॉमर्स हमें बहुत कम समय में ही ये सुविधाएँ प्रदान करता है और वृहद रूप से इसकी सूचना हमें प्राप्त होती है।

• ई-कॉमर्स के माध्यम से ग्राहक अपने मनोनुकूल उत्पाद की खरीद के लिए इंटरनेट का उपयोग कर एक मोबाइल से लेकर कार तक खरीद सकता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

उसमें ये सारी सुविधाएं मौजूद रहती हैं और इससे उपभोक्ता के पास ये सुविधाएँ उसके द्वार तक उपलब्ध हो जाती हैं। जिससे कंपनी को भी अपना उत्पाद बेचने के लिए ज्यादा धन खर्च नहीं करना पड़ता है।

• यदि किसी कंपनी और संगठन की खरीद-बिक्री हो रही है तो इसकी सूचना आम लोगों तक ई-कॉमर्स के माध्यम से पहुँच जाती है।

इस नीलामी में वे सभी लोग भाग ले सकते हैं जिनके पास इसकी सूचना है और यह सूचना ई-कॉमर्स के माध्यम से ही हम तक पहुँच सकती है। इसके द्वारा हम कंपनी या शेयर की नीलामी को खरीद सकते हैं।

• इलेक्ट्रॉनिक की दुनिया में उपभोक्ता तथा अन्य उपभोक्ता के बीच उनकी क्रिया प्रतिक्रिया व संप्रेषण और उनके अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन करने में मदद करती है।

इससे इलेक्ट्रॉनिक निर्माता को इस बात का ज्ञान होता है कि हमारे ग्राहक हमारे कंपनी से क्या उम्मीद करते हैं तथा उनके लिए अंकित-किया सुविधाओं को दिया जाए।MPA 17 Free Assignment In Hindi

• ई-कॉमर्स, वैश्विक जगत में बाजार को केन्द्र में न रखकर, ग्राहक को केन्द्र में रखकर चलता है क्योंकि ग्राहक ही उनके सामानों का खरीददार है और ग्राहकों के सुविधानुसार उत्तम व्यवस्था न किया जाए तो ग्राहक उन उत्पादों की तरफ न आकर दूसरे क्षेत्रों की ओर पांव पसारेंगे, जिससे कंपनी को घा? का मुंह देखना होगा।

अतः लाभ की दृष्टिकोण से ई-कॉमर्स केन्द्र में ग्राहक को रखकर हाशिए पर बाजार को रखता है ताकि ग्राहक के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया जा सके और ग्राहकों को मनोनुकूल सुविधाएं मुहैया कराई जा सक

समाज :

• माना कि हमें फ्रिज की जरूरत है और हम दुकान जाएंगे। साधन के द्वारा हम उस तक पहुँचेंगे, तो इसमें हमें डीजल पेट्रोल खपत करना पड़ेगा, श्रम भी लगेगा और पैसा भी व्यय करना पड़ेगा तथा प्रदूषण भी हो सकता है, दुर्घटना भी घट सकती है।

अतः इन सभी चीजों से बचने के लिए ई-कॉमर्स अपने घर पर ही ऐसी सुविधाएँ मौजूद करा देती है कि हम घर बैठे ही सारे कार्य को अंजाम दे सकते हैं और इससे आने-जाने, पैसे, श्रम, समय और प्रदूषण की समस्या से निजात मिल जाती है।

ये सुविधाएं ईको-फ्रेंडली हैं जहाँ तक प्रदूषण की समस्या से तो निजात मिलता ही है, दिमागी परेशानी, कागजी कार्य इत्यादि नहीं होता और कचरे इत्यादि से भी निजात मिलती है।

• समाज को ई-कॉमर्स की सुविधाएं एक ऐसे जीवन शैली में ढाल देती है, हमारा समाज अपने आराम तरीकों के द्वारा अपने सामानों का आदान-प्रदान कर सकता है।MPA 17 Free Assignment In Hindi

• जो सेवाएँ ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध नहीं हो पाती हैं, जो उत्पाद ग्रामीण स्तर पर मुहैया नहीं होती या आसानी से नहीं मिलती है, जिसमें सेवाओं के अंतर्गत शिक्षा, उपाय, व्यावसायिक अध्ययन इत्यादि शामिल हैं। सुविधाएँ ई-कॉमर्स के अंतर्गत आसानी से मिल जाती हैं

• ई-कॉमर्स के विकास के रास्ते में बहुत सारी सहायक सेवा हे जो उपलब्ध नहीं हो पाती। इसके सफल होने में सहायक तत्व है, जैसे-कॉपीराइट निदान, मूल्यांकनकर्ता तथा ई-कॉमर्स के विशेषज्ञ इत्यादि। इन सहायक तत्वों के बावजूद यदि ई-कॉमर्स अपने पैर फैला रहा है तो फिर उसकी असफलता निश्चित है।

कॉपीराइट निदान केंद्र का होना जरूरी है क्योंकि यदि कोई सॉफ्टवेयर जिसकी नकल दूसरे संगठन के लोग करते हैं। किसी संगठन के समुचित योजना की नकल दूसरा संगठन करता है तो इस समस्या का समाधान इसी केन्द्र को करना पड़ेगा और सही न्याय सामने आता है। ,

• तेजी से बदलती इस दुनिया में, विकसित होने की चाह में, ई-कॉमर्स भी आज तेजी से अपने आपको विकसित रास्ते पर लाना चाहती है और बदलाव तो प्रकृति का नियम है।

लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो रूढ़िवादी होते हैं जो बदलाव को नकारते हैं तथा वस्तुस्थिति को वैसे ही बने रहने में उनका समर्थन होता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

इसी तरह ऐसे लोगों की संख्या भी बहुत है जो स्थिति को स्थिर होने की प्रतीक्षा में बैठे हैं ताकि स्थिर होने के बाद ई-कॉमर्स का प्रयोग किया जा सकेगा। इसे लोग आधुनिक तरीके से नहीं परंपरागत तरीके से प्रयोग में लाना चाहते हैं।

• वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय और मानक जो सरकार द्वारा तैयार किए जाते हैं मानक और विनिमय को नया रूप नहीं दिया जा सकता, यह एक समस्या के रूप में सामने आता है जिसका फायदा संगठन वर्ग के लोगों को प्राप्त होता है।

यदि वस्तुओं और सेवाओं के मानकीकरण को पुनः परिष्कृत किया जाये तो उसकी गुणवत्ता में सुधार की संभावना बनी रहती है और ग्राहक इससे काफी प्रभावित होंगे।

• ई-कॉमर्स से संबंधित बहुत सारी कानूनी बाध्यताएं हैं जिसका सूत्र अनसुलझा है। चाहे वह कर से संबंधित हो, गुणवत्ता से संबंधित हो, विनिमय से संबंधित हो, चाहे वह संचार समाज से संबंधित हो, चाहे वह श्रम से संबंधित हो,

चाहे वह संचार ब्रॉडबैंड से संबंधित हो ये अनेक मुद्दे हैं जिस पर कानून अपने नजरिए से बाधा के रूप में सामने आता है। अतः यह स्वतंत्र इकाई या संगठित रूप नहीं है।MPA 17 Free Assignment In Hindi

• ई-कॉमर्स के माध्यम से लोगों के बीच अलगाव हो सकता है क्योंकि जब विभिन्न विचारों का संप्रेषण होगा, विभिन्न व्यापारों का आदान-प्रदान होगा तो स्वाभाविक है कि सभी विचार एकडूस में भिन्न भिन्न रूपों में प्रकट होंगे और लोगों का बीन एक-दूसरे के प्रति द्वेष उत्पन्न होगा और अलगाव उसका अगला चरण साबित होगा।

इससे लोगों के बीच मानवीयता नहीं रह जाती और नैतिकता को अलग रखकर योगदिमागी कसरत को अंजाम देते हैं।

• आम लोगों के बीच यह बात फैली हुई है कि इ-कॉमर्स बहुत ही ज्यादा महंगी है और सुरक्षा के घर से बाहर है अतः असुरक्षित है। ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जो इसका उपयोग नहीं करना चाहते ताकि उसका विचार और कार्य असुरक्षित न हो जाये।

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान

लेन-देन का व्यापार क्रेता और विक्रेता के बीच होता है, जिसके बीच भुगतान की स्थिति को ई-कॉमर्स देखता है और यह भुगतान लेक्ट्रॉनिक विधि द्वारा संपन्न हो सकता है और इसके बिना भी संभव होता है। ई-कॉमर्स इलेक्ट्रॉनिक विधि से भुगतान करती है, जिसकी बहुत सारी विधियाँ हैं जो निम्नलिखित हैं

(1. इलेक्ट्रॉनिक नकदी
(2. इलेक्ट्रॉनिक चेक या ई-चेक
(3. इलेक्ट्रॉनिक भुगतान कार्ड MPA 17 Free Assignment In Hindi

• इलेक्ट्रॉनिक नकदी-भुगतान की अन्य विधियों में चेक, क्रेडिट कार्ड हैं लेकिन इसके इतर नकद भुगतान अभी भी बहुत ही लोकप्रिय है और यह लोगों के बीच विश्वसनीय कार्य प्रणाली है।

नकद भुगतान इसलिए भी अपनी छवि बनाए हुए है कि व्यापारी यदि क्रेडिट कार्ड का उपयोग करता है तो व्यापारी को क्रेडिट कार्ड कंपनी को कमीशन देना होगा।

इसलिए वह यह नहीं चाहता की उसका भुगतान क्रेडिट कार्ड से हो। वह तो चाहता है कि नकद भुगतान हो, जिससे उसका उपयोग तुरंत ही हो सके और उससे वह लाभ की स्थिति में अपने को बनाए रखता है।

बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अपनी पहचान छुपाने की वजह से चेक अथवा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करते और नकद भुगतान करते हैं।

दूसरा कारण यह है कि कुछ लोगों के पास चेक, क्रेडिट कार्ड इत्यादि की सुविधा उपलब्ध नहीं है इसलिए वे नकद भुगतान का उपयोग करते हैं। |

• इलेक्ट्रॉनिक चेक या ई-चेक-इलेक्ट्रॉनिक चेक सार्वजनिक चाबी के आधार पर व्यवस्थित तथा सुरक्षित किया जाता है, जो विश्वसनीयता के आधार के रूप में काम करता है। छोटे-छोटे भुगतानों के लिए भी ई-चेक के द्वारा भुगतान उपयोग के रूप में लाया जाता है।

ई-चेक भुगतान नियमित चेक के बराबर ही अपना मूल्य रखता है। ई-चेक द्वारा भुगतान कैसे किया जाता है। इस प्रक्रिया को निम्न रूपों में संपन्न किया जाता है|

पहला चरण – कोई व्यक्ति ग्राहक के रूप में जब किसी वित्तीय संस्था और बैंक से ई चेक सेवा मुहैया कराने का आवेदन कर यह सुविधा प्राप्त करता है तो यह प्रक्रिया का पहला चरण है।

दूसरा चरण – ई-चेक सेवा प्राप्त करने के बाद ग्राहक अपनी आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए जब व्यापारी से संपर्क में आता है तो वह उस विक्रेता को एनक्रिप्टेड इलेक्ट्रॉनिक चेक ई-मेल के माध्यम से उसे प्रेषित करता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

तीसरा चरण-जब एनक्रिप्टेड ई-चेक विक्रेता को प्रेषित किया जाता है तो वह ई-चेक विक्रेता के खाते में विक्रेता के द्वारा जमा किया जाता है, जो पैसा ग्राहक के खाते में डेबिट किया जाता है तथा विक्रेता के खाते में क्रेडिट के रूप में जमा होता है।

लेक्ट्रॉनिक भुगतान कार्ड – बहुत समय पहले से इलेक्ट्रॉनिक कार्ड का प्रयोग होता रहा है, जिसे क्रेडिट कार्ड इत्यादि के रूप में जाना जाता है। क्रेडिट कार्ड जिसमें चुम्बकीय स्ट्रिप पाया जाता है. जिसमों कम से कम सूचनाओं को अंकित किया जाता है, जैसे कार्ड नम्बर का संग्रहण किया जाता है।

क्रेडिट कार्ड का उन्नत तथा विकसित रूप दुकानों, पुस्तकालयों टेलीफोन बिल, राशन बिल इत्यादि के रूप में देखा जाता है, जिसका उपयोग बिल भुगतान करने के प्रयोग में लाया जाता है।

प्रश्न 9. भारतीय रेलवे में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रयोगों पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-भारतीय रेलवे में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी-वर्तमान में सूचना एवं संचार में जिस प्रकार हरेक क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिर्वतन लाया, उससे भारतीय रेल भी अछूता नहीं रहा।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी द्वारा भारतीय रेलवे के विशाल प्रचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी जा रही है तथा भारतीय रेल की बहुत-सी सेवाएँ और प्रकार्य सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा सुगम बनाए जा रहे हैं।

भारतीय रेलवे में कम्प्यूटरीकरण 1960 के दशक के उत्तरार्ध में प्रारंभ हुआ, जब उसके नौ क्षेत्रीय रेलवे तीन उत्पादन इकाइयों और रेलवे बोर्ड में आईबीएम अधिष्ठापित किया गया।

शुरुआती दौर में बहुत से अनुप्रयोगों, उदाहरणस्वरूप-यात्री राजस्व और माल लेखाकरण, वित्त प्रबंधन, सामान-सूची प्रचालन सांख्यिकी आदि का कम्प्यूटरीकरण किया गया। MPA 17 Free Assignment In Hindi

यद्यपि ये प्रणालियाँ रेलवे के लिए जहाँ लाभप्रद सिद्ध हुईं, वहीं दूसरी तरफ ये प्रणालियाँ रेलवे की बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने में अपर्याप्त पाई गईं।

1985-90 का दौर जो सातवीं पंचवीय योजना का समय था आई.बी.एम. 1401 को तीसरी और चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर प्रणालियों से बदला गया, उत्पादन काइयों और क्षेत्रीय रेलों में कम्प्यूटरीकरण को सुदृढ़ किया गया और प्रमाणों, कार्यशालाओं तथा भण्डारों में कम्प्यूटर लाए गए।

बदलते परिवेश में नए क्षेत्रों में भी, जैसे-यात्री आरक्षण प्रणाली, माल-भाड़ा प्रचालन सूचना प्रणाली, ई-टिकटिंग आदि में भी कम्प्यूटरीकरण प्रारंभ किया गया।

रेल मंत्रालय ने 1986 में भारतीय रेलवे में सभी कम्प्यूटर कार्यों के लिए अलग संगठन स्थापित किया। यह संगठन ‘टोल सूचना प्रणाली केंद्र’ [Centre for Railway Information Systems (CRIS)] के नाम से जाना गया।

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र

1986 में रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे में सभी कम्प्यूटर संबंधित कार्यों के लिए रेल सूचना प्रणाली केंद्र नई दिल्ली में स्थापित किया। इस प्रणाली केंद्र ने जुलाई 1987 में काम करना आरंभ किया। यह प्रबंधक निदेष्ठाक के अधीन एक स्वायत्त संगठन है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

रेल सूचना प्रणाली केंद्र रेलवे में प्रमुख कम्प्यूटर प्रणालियों के विकास में लगा हुआ मुख्यतया परियोजनामुखी संगठन है। इसने सूचना विज्ञान के क्षेत्र में विशेष मान और विशेषज्ञता प्राप्त की है।

कम्प्यूटर संबंधित कार्यों के लिए भारतीय रेलवे द्वारा पृथक संगठन निम्नलिखित कारणों से उपयुक्त समझा गया

(1. अलग-अलग व्यक्तिगत रेलवे द्वारा किए गए प्रयासों की पुनरावृत्ति (Duplication) का परिहार करने के लिए।
(2. कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का मानकीकरण सुनिश्चित करने हेतु।

(3. रेलवे में मुख्य अनुप्रयोगों के डिजाइन और विकास के लिए, जिसमें उच्चतम विशेषज्ञता, शीघ्र निर्णयन और प्रणाली में व्यापक प्रयोग्यता अपेक्षित है।

(4. रेलवे में कम्प्यूटर अनुप्रयोग के विकास के लिए रेलवे और कम्प्यूटर विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता के लिए।

(5. संगठन जो रेलवे के दिन-प्रतिदिन के कार्य से अलग रह सकें, जिससे कि वह अपने उद्देश्य पर ध्यान दे सकें।

(6. उच्च विशेषज्ञ क्षेत्रों, जैसे-प्रचालन अनुसंधान, अनुकरण विशेषज्ञ प्रणाली, सी.ए.डी./सी.ए.एम., प्रोसेस नियंत्रण आदि में विशेषज्ञता के विकास की आवश्यकता के लिए।

(7. तेजी से बदलती हुई प्रौद्योगिकी से गति बनाए रखने के लिए अधिक लचीलेपन की आवश्यकता के लिए

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र निम्नलिखित परियोजनाओं को देखती है।

(1) यात्री आरक्षण प्रणाखा/
(ii) राष्ट्रीय रेलगाड़ी पूछताछ प्रणाली,

(iii) अल्फा प्रवासन,
(iv) अनारक्षित टिकट प्रणाली. MPA 17 Free Assignment In Hindi

(v) इंटरनेट पूछताछ,
(vi) माल-भाड़ा प्रचालन सूचना प्रणाली।

यात्री आरक्षण प्रणाली – भारतीय रेलवे विश्व की दूसरी सबसे बड़ी रेल प्रणाली है, जिसका प्रचालन क्षेत्र बहुत विस्तृत है। भारतीय रेल प्रतिवर्ष लगभग 5.5 अरब यात्रियों और लगभग 49.2 करोड़ टन माल वहन करती है। 8250 रेलगाड़ियों में प्रतिदिन 1.5 करोड़ यात्री |

यात्रा करते हैं, जिसमें से 5.5 लाख यात्री आरक्षित स्थानों पर यात्रा करते हैं। इसमें यात्री देश के किसी भी भाग में यात्रा आरंभ करके किसी भी भाग में यात्रा समाप्त कर सकते हैं। चुनौती ऐसे आरक्षण प्रणाली प्रदान करने की है, जो यात्रियों की विशाल संख्या को सेवा व सुविधा उपलब्ध करा सकें। _

भारतीय रेलवे की वेबसाइट को कार्यान्वित और पोषित करने का काम रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र ने किया है।

यह सूचना स्थान उपलब्धता, PNR स्थिति, स्टेशन कोड, गाड़ी सारणी और रेल किराया से संबंधित होती है। मोबाइल पर अल्प संदेश सेवा SMS के माध्यम से भी पूछताछ प्रदान की जा सकती है।

यात्री आरक्षण प्रणाली आरक्षण और टिकटिंग प्रणाली कार्यान्वित करने के लिए निम्नलिखित का प्रयोग करती है

(i) एच.पी (HP) का अल्फा सर्वर (Alpha Server) हार्डवेयर,
(ii) प्रचालन तंत्र (HP)-ओपन वी.एम.एस (Open VMS),

(iii) 2M.B. पट्टाचित DOT लाइनों पर 5 यात्री आरक्षण प्रणाली केंद्रों के नेटवर्क का कार्यांवयन करने के लिए मार्गक (Routers),

(iv) DOT और पट्टाचित लाइनों पर 5 यात्री आरक्षण प्रणाली केंद्रों से संबद्ध 4000 से अधिक टर्मिनल,
(v) Dec Net Phase V/TCP-IP नेटवर्किंग सॉफ्टवेयर।

राष्ट्रीय रेलगाड़ी पूछताछ प्रणाली – अगस्त 1998 में राष्ट्रीय रेलगाड़ी पूछताछ प्रणाली प्रायोगिक परियोजना के रूप में कार्यावित की गई थी। इस प्रणाली के द्वारा यात्रियों को अद्यतन तथा सही सूचना प्रदान की जाती है

(i) यात्री रेलगाड़ियों के प्लेटफार्मों के बारे में.. MPA 17 Free Assignment In Hindi
(ii) रेलगाड़ी के संभावित आगमन समय सहित यात्री रेलगाड़ी का आगम-प्रस्थान,

(iii) यात्रा नियोजन,
(iv) स्टेशनों पर उपलब्ध सुविधाएँ,
(v) रेलवे के नियम।

यह सूचना स्टेशनों, नियंत्रण कार्यालयों और अन्य डाटाबेस प्रशासकों से संग्रह की जाती है। इस प्रणाली के अधीन देश भर के सभी 61 नियंत्रण कार्यालय के हर आधे घंटे बाद कम्प्यूटरों में वास्तविक समय आधार पर चलने वाली रेलगाड़ी की स्थिति भरी जाती है।

इस प्रकार जब रेलगाड़ी प्रारंभ स्टेशन से शुरू होती हैं देश भर में उसकी प्रचालन स्थिति ज्ञात होती है और इसकी जानकारी पूछताछ और अन्योन्य क्रिया वाक् अनुक्रिया प्रणाली को प्रदान की जाती है।

अन्योन्य क्रिया वाक अनुक्रिया प्रणाली 100 स्टेशनों पर स्थापित की गई है और अन्य स्टेशनों पर भी इसका विस्तार किया जा रहा है, जिसके द्वारा यात्री फोन पर की गाड़ी के चलने की स्थिति और आरक्षण की स्थिति जान सकते हैं।

इस प्रणाली के जरिए यात्रियों को सूचना, सूचना पट्टिकाओं (Display Board), सार्वजनिक सूचना प्रणाली, आमने-सामने पूछताछ, सी.सी.टी.वी. और इंटरनेट के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाती है।

इस समय कोलकाता और दिल्ली के शहरों में आरक्षण सूचना सेलफोन पर दी जाती है। आरक्षण की स्थिति भारतीय रेलवे वेबसाइट पर भी प्रदान की जाती है।

इंटरनेट पूछताछ – सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास के कारण सरकारी तथा गैर-सरकारी उपक्रम में ई-सेवा आरंभ की गई है। भारतीय रेल ई-सेवा के क्षेत्र में अग्रणी है।

ई-टिकटिंग, ई-पूछताछ, ई-प्रबंधन आदि सेवाएं रेलवे द्वारा आरंभ की गयी हैं। भारत में प्रत्येक व्यक्ति तक इंटरनेट पूछताछ पहुँच चुका है किन्तु तकनीकी सुलभता के अभाव में आज भी अनेक लोग फोन सेवा के माध्यम से पूछताछ का उपयोग करते हैं। MPA 17 Free Assignment In Hindi

फिर भी PNR स्थिति, आगमन प्रस्थान, सीट उपलब्धता आदि की जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

यात्रियों द्वारा रेल सेवा संबद्ध जानकारी निम्नलिखित तरीकों से प्राप्त की जाती है

(1. पूछताछ काउंटर से,
(2. दैनिक समाचार पत्रों द्वारा,

(3. टेलिविजन तथा रेडियो के प्रसारण द्वारा,
(4. टेलिफोन अथवा मोबाइल फोन द्वारा,

इंटरनेट पर टिकट बुकिंग – संचार क्रान्ति ने जिस प्रकार सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया उसमें एक भारतीय रेलवे भी है।

28 फरवरी 2000 से सामान्य पूछताछ, स्टेशनों के नियमित युगलों के बीच रेलगाड़ियाँ, आरक्षण उपलब्धता, PNR स्थिति, रेलगाड़ी, अनुसूची और स्टेशन कोड इंटरनेट के माध्यम से सामान्य जनता के लिए उपलब्ध की जा रही हैं।

बहुत कम समय में ही भारत में सबसे अधिक प्रचालित विबसाइटों में से एक हो गई, जिसे प्रतिदिन लगभग 17 लाख पष्टच्छाएँ प्राप्त होती हैं। संपूर्ण भारत में मोबाइल फोन पर भी एस.एम.एस. मिवा द्वारा सूचना उपलब्ध कराई जा रही है

। वर्तमान में यात्री सूचना और बुकिंग के लिए रेल आरक्षण वेबसाइट का मी अभिगम कर सकते हैं। इस सुविधा के लिए यात्री तारीख और श्रेणी का चयन कर लेते हैं तथा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान द्वारपथ के माध्यम में ट्रांसजेक्शन प्रोसेस की जाती है, जो भुगतान प्राधिकृत करता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi

इसके बाद Ticket बुक हो जाती है तथा PNR स्थिति ग्राहक को दी जाती है। सूचना पूरी तरह से सुरक्षित तथा गोपनीय रहती है जिसे गूढलेखित रूप से दूर संचार चैनलों के माध्यम से भेजा जाता है।

क्रेडिट कार्ड के ब्यौरे, भारतीय रेल खानपान और पर्यटन निगम IRCTC के डाटाबेस में या अन्यत्र कहीं भी स्टोर नहीं किए जाते हैं। टिकट कूरियर द्वारा या निर्दिष्ट काउण्टर से टिकट संग्रह करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर उपकर (Service Charge) भी लिया जाता है। इसी प्रकार टिकट किसी भी रेलवे आरक्षण प्रणाली (PRS) काऊंटरों से रद्द भी करवाई जा सकती है। धन वापसी की राशि क्रेडिट कार्ड बिल में दर्शाई जाती है।

माल-भाड़ा प्रशासन सूचना प्रणाली – सरकार 1982 में भारतीय रेलों के लिए माल भाड़ा प्रचालन सूचना प्रणाली स्थापित की थी, परंतु 1986 में रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र की स्थापना से भारतीय रेलवे में कम्प्यूटर संबंधी सभी कार्य इसे दिए गए हैं। MPA 17 Free Assignment In Hindi

माल-भाड़ा प्रचालन सूचना प्रणाली ने 1950 तक करोड़ टन माल माल-भाडा परिवहन में काफी लंबा सफर तय किया।

पर्याप्ताप्रयास के खार कम्प्यूटर पर माल की बुकिंग और प्रेषण वितरण, स्टेशन लेखाकरण, रेलवे रसीद का निर्माण और प्रेषण तथा ग्राहकों से अधिक अच्छा अंतरापृष्ठ इस प्रणाली द्वारा संभव हुआ इससे अतिरिक्त पाइन्ट, रिपोर्टिंग के 4 नोडल और 48 आरंभ टर्मिनलों के नेटवर्किग से टर्मिनल प्रबंधन में सहायता मिली है।

वैगन के अनुसार प्रेषण का पता लगाना, स्टॉक होल्डिंग की निकासी, बीजक आधारित लोडिंग, आरंभिक टन भार और राजस्व, वैगन के अनुसार अंत: परिवर्तन गुम वैगनों का वितरण और अनजुड़े प्रेषण का शृंखलन माल भाड़ा प्रचालन सूचना प्रचालन सूचना प्रणाली ने संभव बनाया है।

सुरक्षा-भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए कई प्रौद्योगिकीय सुविधाएं प्रदान करता है। इंटरनेट के माध्यम से वैश्वीकरण की प्रक्रिया तीव्र ति से चल रही है। राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा को लेकर कई कानून बनाए गए हैं।MPA 17 Free Assignment In Hindi

चूंकि ऑनलाइन प्रणाली जितनी सुविधाजनक है उतना ही असुरक्षित भी। यूजर आइडी हैकिंग तथा पासवर्ड हैकिंग का मामला ज्यादातर सामने आ रहा है। सूचना प्रणाली के अंतर्गत जब तक सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिलता आम जनता पूर्ण रूप से इस प्रणाली का उपयोग नहीं कर पाएगी।

डाटाबेस सुरक्षा एक अन्य समस्या है इसके लिए भारत में आपातकालीन अनुक्रिया दल की स्थापना सन 2003 में की गयी थी। रेलवे आरक्षण प्रणाली तथा माल-भाड़ा प्रचालन सूचना को सुरक्षित रखने में यह दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

साथ ही आपातकालीन अनुक्रिया दल के द्वारा डाटाबेस की गोपनीयता एवं विश्वसनीयता को भी बनाए रखा जाता है। इसके अतिरिक्त साइबर सुरक्षा में यह दल निम्नलिखित कार्य कलापों को सुनिश्चित करता है

(1. प्रशिक्षण तथा अनुसंधान,
(2. सुरक्षा के प्रति जागरूकता,

(3. पूर्व चेतावनी,
(4. रेल सुरक्षा नीतियों और मार्गदर्शनों को प्रस्तुत करना

(5. रेलवे नेटवर्कों का आकलन,
(6. रेलवे उत्पादों की जांच करना,
(7. साइबर घटनाओं को रोकना। MPA 17 Free Assignment In Hindi

इस प्रकार की सुरक्षा में डाटाबेस को संरक्षित रखने के लिए हार्डवेयर स्तर पर विशेष प्रयत्न किये जाते हैं। वेबसाइट की सुरक्षा के लिए फायरबॉल को प्रयोग किया जाता है, जो वायरस को रोककर तथा URL को अवरुद्ध कर देता है।

फायरबॉल मेल तथा वेब को सुरक्षित रखता है। कई प्रकार की फाइलों को नियमित रूप से डिटेक्ट किया जाता है। MPA 17 Free Assignment In Hindi
भारतीय रेलवे द्वारा तकनीकी विकास के प्रयोगों से यात्रियों को सुविधा प्रदान करने का प्रयास सराहनीय है।

MPA 16 FREE SOLVED ASSIGNMENT 2021-22

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