प्रश्न 1 हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छांह, एक पुरुष

उत्तर- संदर्भ- प्रस्तत पंक्ति जयशंकर प्रसाद की कामायनी से लिया गया है।

व्याख्याकामायनी महाकाव्य का यह प्रथम सर्ग है। इसमें प्रसाद जी लिख रहे हैं

कि हिमालय पर्वत की ऊंची चोटी पर, शिला की शीतल छाया में एक पुरुष बेठा था।

ओर वह अश्रुपूर्ण नेत्रों से जल प्रलय के फलस्वरुप उत्पन्न हुए उस अपार

जल राशि को देख रहा था। प्रसाद जी कह रहे हैं कि उस पुरुष के नीचे जल और ऊपर हिम था

वह अपने चारों तरफ जल तत्व की ही प्रधानता देखता है।

एक तरल रूप में था तो दूसरा ठोस रूप में था।

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